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क्यूँ दर्द दिया या रब ने

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English Poetry, Hindi Poetry

क्यूँ दर्द दिया या रब ने
सुधीर पाल
उदास- उदास इसकदर आज वो बैठे हैं
लगता है किसी को दिल दे बैठे हैं..

कहते थे इश्क नहीं करेंगे उमर भर
क़त्ल करने डगर में आज बैठे हैं..

रहा नहीं गया उनसे तन्हा अब बाकी
इंतज़ार में इतने बेसुध से बैठे हैं..

नज़र पसरी है दूर तलक कुछ नहीं निशां
कितने ख्यालात संजोये आज बैठे हैं..

कोई जाने क्यूँ दर्द दिया या रब ने,
सुर्ख आँखों से क़यामत सी ढाए बैठे हैं..

०सुधीर पाल

One Comment

  1. parminder says:

    क्या बात है! शब्दों में क्या चित्र पिरोया है! लगता है वोह हमारे सामने ही बैठे हैं !

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