« »

हर राजनितिक दल, जैसे काटने वाला जूता है……..

1 vote, average: 4.00 out of 51 vote, average: 4.00 out of 51 vote, average: 4.00 out of 51 vote, average: 4.00 out of 51 vote, average: 4.00 out of 5
Loading...
Uncategorized

हर राजनितिक दल, जैसे काटने वाला जूता है……..

तेरे मेरे गले में हो, “नोटों” की “माला”,
कैसे संभव होगा, दे किसका “हवाला” ,
बहुत अगर “माया” चाहिए, तो ऐसा कुछ करें,
“कमल” के फुल, “लक्ष्मी” के “हात” में दे धरें ,
जब “गड़” पर “करी” ये राज, “निति न” काम आती,
इनके “हात” में भाग्य की रेखा, उनकी सेवामे “हाथी”,
जब तक थे बोल “मुलायम”, “अमर” होती थी वाणी,
ज्यों ही तीखे बोल पड़े, पीना पड़ा घाट घाट का पानी,
बड़े भैया साथ न आये, ना ही भाभी ने पुचकारा,
कही न हो रही सुनवाई, ना देता कोई “सहारा”,
हर राजनितिक दल, जैसे काटने वाला जूता है,
कोई भी नेता इससे, रहता नहीं अछुता है,
पहनकर इस जूते को, हर कोई ज्ञान बांटता है,
नेता को ही पता होता है, यह जूता कहाँ कहाँ काटता है……….

16 Comments

  1. rachana says:

    tikha vyang! bahut achcha!

  2. vpshukla says:

    sundar prastuti.badhai.

  3. ashwini kumar goswami says:

    आजकल माया जहां भी है तीब्र गति से महामाया बनती जा रही है तो माला भी
    साथ साथ महामाला होने लगी है ! नोट और वोट आजके सर्वशक्तिशाली तत्व हैं,
    हर स्तर पर अब इन्हीं का महत्व है ! यद्यपि दोनों में उंच-नीच दिखने की स्पर्धा
    होती रहती है, किन्तु गहनता से सोचें तो नोट का पद ही ऊंचा होता है क्योंकि इसके
    बल से ही वोट प्राप्त करने हेतु खड़ा होना संभव होता है ! मूक-दर्शक बने रहने में ही
    भलाई है क्योंकि केंसर की भांति यह स्थिति भी अब लाइलाज हो गई है ! बस इतना ही समझ के संतोष करना होगा के बुरे का अंत बुरा ही होता है !

  4. siddha Nath Singh says:

    करारा कुरमुरा टटका और मारक व्यंग्य,बधाई हो भाई .

  5. Vishvnand says:

    बहुत खूब, डॉक्टर साहब आपने इस बीमारी का बढ़िया और उचित सा diagnosis पर विवरण किया है .
    अति सुन्दर व्यंगात्मक अर्थपूर्ण रचना, हार्दिक बधाई
    पढ़ कर दिल बाग़ बाग़ हुआ और व्यथित भी …
    क्या कर सकते हैं.
    इतने जूते पाकर भी नहीं सुधरते और यही दूसरों के मिले जूते भूषण सा पहनते हैं, इन जूतों को भी गुस्सा आता है और वो काटते हैं, पर इनको अब काटते जूते पहनने की भी आदत ही हो गयी है, उसके बिना इन्हें चैन नहीं आता. … 🙂

  6. Ravi Rajbhar says:

    बहुत खूब dr. shaheb ,
    इस रचना ka कोई जबाब नहीं…khas kar U.P. की halat का तो अपने बिलकुल सही खाका ही खीच दिया…!
    बधाई … 🙂

  7. U.M.Sahai says:

    बहुत ही अच्छा , करारा व सटीक व्यंग्य किया है, मज़ा आ गया , बधाई हो पालीवाल जी

  8. pallawi says:

    bohut achcha byang !!

Leave a Reply