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तुम

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Hindi Poetry

लोगों ने चाँद देखा मैंने तारे को

लोगों ने रौशनी देखी मैंने अंधियारे को

लोगों ने दुनिया देखा ,मैंने जागती मौत को

लोगों ने फायेदा देखा मैंने मज़बूरी

लोगों ने तुम्हारे हँसते होंठ देखे, मैंने तुम्हारी आँखों को

लीगों ने तुम्हे सुना, मैंने तुम्हारी सांसों को

लोगों से तुम्हारी आवाज़ सुनी ,मैंने तुम्हारी ख़ामोशी

लोगों ने बोहुत कुछ जाना मैंने ”तुम्हे

13 Comments

  1. Sanjay singh negi says:

    bav to bahut hi sundar hai
    pr laybaddh nahi hai
    pr ek badiya bavo se bhri kavita

  2. पल्लवी, एक अच्छी कोशिश . भाव अत्यंत गहरे है. थोडा शब्द विन्यास लड़खड़ा रहा है.फिर भी बहुत अच्छी कविता. शुभाशीष

    • pallawi says:

      thanku sir mai utna jaanti nahi bas likhne ki kosis kar rahi hu aaplogon ki baaton pr jarur dhyan dungi dhanyabaad

  3. vmjain says:

    vikas ji se sahmati.

  4. siddhanathsingh says:

    बहुत खूब,
    तुमको जान लिया जब हमने अब क्या और बचा है.
    नाफ़हमी है जग की जिसके चलते शोर मचा है.

    • pallawi says:

      @siddhanathsingh
      vicharon ka aawagaman to hamesha chalta hai is chote se mann me pr use kavita ka naam dena thoda muskil hai mere liye parantu mai kosis kar rahi hu ki laybadh ho dhanyabaad aap sabhi logon ka ,

  5. parminder says:

    बहुत सुन्दर भाव हैं| बहुत ही गहरी सोच है|

  6. dr.paliwal says:

    Bhav achchhe hai…. Rachna bahut achchhi hai….
    Vikas ji ke sujhav par dhyan den……

  7. Ravi Rajbhar says:

    बहुत खूब वर्मा जी,
    आखिरी लाइन ही कविता की जान है… बधाई 🙂

  8. pallawi verma says:

    dhanyabaad aapka !!

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