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अंदाज़-ए-शायरा

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Hindi Poetry

देते हैं वो ख़ुदकुशी का इल्जाम हमी को
ज़हर हाथों से अपने पिलाने के बाद
चाहते हैं करना जिंदा फिर से आरज़ू
अरमां सारे जलाने के बाद

6 Comments

  1. prachi says:

    veryyy nice neha 🙂

  2. siddha Nath Singh says:

    बहुत खूब. मगर क्या न क़त्ल्गाहों के उच्छिष्ट पर फूल खिलते हैं.कहते हैं बायो वेस्ट से बनी खाद सबस अच्छी और उपजाऊ होती है.

  3. U.M.Sahai says:

    बहुत उम्दा, नेहा, वैसे सही शब्द ख़ुदकुशी है न कि खुदखुशी.

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