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नहीं लड़की, तुम मुझे कवि ना कहना

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Hindi Poetry


नहीं लड़की, तुम मुझे कवि ना कहना
कवि मैं दूसरों के लिये रहूँगा.
तुम्हारे लिये तो एक पागल आशिक ही हूँ –
जो कविताओं में बातें करता है, हरदम करूँगा.
पर कवि? मैं दूसरों के लिये रहूँगा.

मेरी कविताएँ, तुम्हारे साथ किये गये मूक संवाद हैं
शब्द तुम्हारी प्रेरणा से उपजते हैं, ये छंद तुम्हारी सौगात है
तुम कोख हो इन कविताओं की. सो, तुम्हारे समक्ष –
मेरे लिये कवि हो पाना असंभव सी बात है.
ये छंद तुम्हारी सौगात है

नहीं लड़की! मैं तुमसे वैचारिक दूरी नहीं बना पाऊँगा.
या तो तुम्हें खींच लूँगा या खुद तुम्हारे पास आऊँगा.

8 Comments

  1. prachi says:

    just touched my heart,,speechless 4 any comment vikash 🙂 loved it

  2. Vishvnand says:

    क्या बात है
    बहुत बढ़िया, मनमोहक भाव और अंदाज़.
    अति सुन्दर ….
    चलो उनके लिए नहीं, पर हमारे लिए तो सही, कवि ऐसे ही बने रहना
    और अपनी सुन्दर कविताओं और कवित्व का स्वाद हमें यूं ही देते रहना…

  3. rachana says:

    beautiful…keep it up!

  4. vmjain says:

    बहुत मन भाई. हमारे लिए कवि बने रहना.

  5. U.M.Sahai says:

    वाह क्या बात है, मज़ा आ गया, दिल के भी बहुत ही भीतरी भाग से लिखी गयी है ये कविता, और जो साथ में एक पेड़ और महबूबा का लाइन स्केच दिया गया है वोह तो सोने पे सुहागा है, बधाई हो विकाश .

  6. vartika says:

    🙂 sunder kavyatmak sanvaad… mook naa ho kar bhi mook… kyunki shabdon mein jitnaa kaha gaya usse adhik asar rakhti hai yeh kavitaa… nayi taazgi liye hue lagi yeh rachnaa….

  7. parminder says:

    बहुत खूबसूरत अंदाज़ और उससे भी खूबसूरत शब्द जो आपने इस कविता में पिरोये हैं |

  8. kanhaiya says:

    awesome.. 🙂

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