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अंदाज़-ए-शायरा

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Hindi Poetry

कुछ रातों की सुबह नहीं होती
कुछ लफ़्ज़ों की ज़ुबां नहीं होती
कह जाती हैं जो ऑंखें आँखों से
वो दास्ताँ कभी बयाँ नहीं होती

8 Comments

  1. U.M.Sahai says:

    उम्दा अंदाज़, नेहा. Keep writing and sharing.

  2. Vishvnand says:

    बहुत बढ़िया हैं ये चार लाइने
    दिल झूमने लगा इसके माइने में खोने …
    क्या बात है, बहुत बधाई

  3. Reetesh Sabr says:

    रुबाई पसंद आई…

  4. siddha Nath Singh says:

    achchhi lagi

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