| « दर्द | जो कि पुराने ज़ख्म कुरेदें,वो अफ़साने क्यों पढ़ते हो ! » |
हम आगे बढ़ रहे हैं ….!
हम आगे बढ़ रहे हैं ….!
जो वो कह रहे हैं
बात तो बहुत सही है,
हमें ये देखना जरूरी है
कि कविता पर अपना कमेन्ट,
अपनी तरफ से सही हो.
जैसी कविता जंची वैसी प्रतिक्रिया हो
पर ये भी जरूरी है की कमेन्ट पढकर
कवि निराश न हो, सुधरे, सीखे और उत्साहित रहे.
ख़राब कविता की तो बात अलग है,
पर कविता गर अच्छी है, अच्छा प्रयास है,
तो जिन कविमित्रों को कविता में खामियाँ नज़र आयें,
उन्हें अपने कमेन्ट में ये जरूर बताना है
इस तरह की मेम्बर अपनी गल्तियाँ समझे, सुधारे,
उत्साहित रहे और आगे सही दिशा में तरक्की करता करे
मेम्बरों को भी चाहिए वो ऐसी प्रतिक्रियाओं का,
गलत अर्थ न ले बल्कि उन्हें अच्छे भाव और आदर से स्वीकारे.
क्या ऐसा हो सकता है ?
हमें तो आशा और बहुत उत्साह है
कि हम इस दिशा में ही आगे बढ़ रहे हैं.
आपका क्या ख्याल है?
—- xxx —-
10 Comments
आलोचना जरुरी है,कहा गया है कि ;निंदक नियरे राखिये आंगन कुटी छवाय ;
Vishvnand Reply:
February 9th, 2010 at 5:29 pm
@vpshukla
आपका कहना ठीक है पर मेरी भी बात जो ऊपर कही है उसपर भी कृपया गौर कीजिए.
कहावत ठीक ही है पर निंदा करना बुरा है यह भी तो है. किस प्रकार कमेन्ट किया जाता है उसपर ही बहुत कुछ निर्भर रहता है.
बशीर बद्र-
“मुखालफत से मेरी शक्सियत सवंरती है,
मैं दुश्मनों का बड़ा एतराम करता हूँ. ”
इन्ही भावों की जरूरत है.
Vishvnand Reply:
February 9th, 2010 at 5:34 pm
@vmjain
आप सही हैं . ये भाव जब खुद की रचना पर आलोचक कमेन्ट मिलते हैं तब होना बहुत जरूरी है. पर कमेन्ट देते समय होना, गलत.
मैं भी वी पी शुक्ला एवं वी एम जैन जी की टिप्पड़ियों से पूरी तरह से सहमत हूँ
Vishvnand Reply:
February 9th, 2010 at 6:10 pm
@U.M.Sahai
मैं भी आपकी टिप्पणी से पूर्ण सहमत हूँ. ये कहावतें तो अपनी जगह बहुत सही और वैचारिक हैं. इसमें कोई दो राय नही हो सकती. बात इन कहावतों के शब्दार्थ को कृति में किस उचित तरह से लाने की है कमेन्ट खुद की रचनाओं पर मिलते समय और अन्य मेम्बरों की रचनाओं पर कमेन्ट करते समय और आगे चलकर अपने कमेन्ट पर अन्य मेम्बरों के आलोचक कमेन्ट के मिलते समय.
यही विचार मैंने इस पोस्ट के भावार्थ में जताने की कोशिश की है
सो बोतलोंका नशा है एक वाहवा में!
Vishvnand Reply:
February 25th, 2010 at 9:11 am
@Milind
वाह, क्या बात है ..
बहुत कुछ समाया है,
आपकी इस छोटी सी पंक्ति में …
धन्यवाद…

Retired senior engineering, marketing & operations management Executive with Passion for & deeply interested in reading & listening to all varieties of poetry & songs and in particular those rendered in Hindi/Hindustani. Also interested in & loves reciting & rendering his own poems/compositions & songs on various subjects, composing tunes for songs and singing. Loves to & adept at playing Harmonium as accompaniment to singing & also as accompaniment to others performing.
.......Location: Pune & Mumbai
आशा है समालोचना की जायेगी मात्र एक दुसरे की प्रशंसा से कोई उद्देश्य सफल नहीं होता है.
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Vishvnand Reply:
February 9th, 2010 at 5:21 pm
@siddhanathsingh
हर मेंबर को जब वो किसी अन्य मेम्बर की रचना की गल्तीओं पर कमेन्ट करता है ( जो बहुत जरूरी भी है), कमेन्ट देने के पहले थोड़ा सोचना चाहिए अगर ऐसी कुछ गलतियां खुद की होती तो इस बारे में वो कैसा कमेन्ट चाहता और फिर अपना कमेन्ट उसी हिसाब से देना चाहिए .
यही मेरा सुझाव है और ऐसा कमेन्ट अपने आप ही उचित हो जाता है. सिर्फ आलोचना या अलोचाकता ही नहीं रहता, ” Critical appreciation “( निरूपण) बन जाता है.
व्यर्थ की प्रशंसा और वो भी गलत जगह ऐसा यहाँ बहुत कम हो रहा है, और ऐसे दोस्त गलत प्रशंसा कर अपने ही दोस्त को दुखी और शर्मिन्दा सा होने मजबूर करते हैं ऐसा मेरा मानना है और उन्हें भी इसका ख्याल रहना चाहिए..
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