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भला हो उनका जो पीछे से वार करते हैं ;

पास में जाओ तो पैमाने बदल जाते हैं ;
दूर जाओ तो हर अफसाने बदल जाते हैं [१]
जिंदगी एक हंसी झूठ को जीना ही है ;
तेज हो धुप तो अपने साये बदल जाते हैं [२]
सर्द सांसो में अब पुरजोर कशिस  है बाकी;
जिनको चाहो वाही सब चेहरे बदल जाते हैं [३]
यंहा बसंत तो खारो पे नजर आता है ;
फूल हर सू यंहा कुम्हलाये नजर आते हैं [४]
जान कर भी अगर जख्मो को चुन रहा कोई ;
फिर कंहा दर्द के लम्हे भुलाये जाते हैं [५]
भला हो उनका जो पीछे से वार करते हैं ;
जीते जी हम कभी उनको न समझ पाते हैं[६]
                                         विजय  
10 Comments

ये कविता ग़ज़ल तो नहीं लगती है. एक शेरों का संग्रह मात्र प्रतीत होती है जो किस औचित्य से एक साथ रखे गए हैं स्पष्ट नहीं है. अगर ”बदल जाते हैं” यही तुक रखनी थी तो हर शेर में आनी चाहिए थी. ‘बदल जाते हैं ‘ और ‘नज़र आते हैं’ और ‘फिर भुलाये जाते हैं’ और अंत में ‘ समझ पाते हैं ‘ ये सारे अलग अलग तुकों वाले शब्द समूह हैं जो एक ग़ज़ल में एक साथ रखना सही नहीं प्रतीत होता है. भावों को व्यक्त करने की उतावली शिल्प का संहार कर दे तो अच्छा नहीं लगेगा.आशा है शुक्ल जी थोडा इस पहलू पर भी ध्यान देंगे और कलम को मान्जेंगे ताकि वह बेलगाम अश्व न हो कर अर्थ के रथ को खींचने वाले घोड़ों की तरह व्यवहार करे.

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vpshukla Reply:

@siddhanathsingh, आपकी प्रतिक्रिया अच्छी लगी ;थोडा विरोध करूँगा .
शेर अलग अलग भाव ही रखेंगे .इसपे मुआफी चाहूँगा ;जन्हा तक
शैली का सवाल है ;जाते हैं; को भी आखिरी शब्द माने जा सकते हैं ;
अतुकांत कहा लगी कविता ?वैसे भी भाव मेरे लिए ज्यादा मायने रखते है .
कोशिश करूँगा कि प्रयोगधर्मी बनू ,

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मुझे तो ये रचना बहुत अच्छी लगी, बहुत सुन्दर और अर्थपूर्ण..
इसको ग़ज़ल ही की तरह रचना या ग़ज़ल कहना क्या जरूरी है ?.
अगर हर शेर एक के बाद एक लिखने के वजाय उनके बीच space रखें तो शायद पढ़ने में ज्यादा मजा आये और कोई ऐसा objection भी न हो.
मैं इस बारे में उतना जानता नहीं हूँ, पर यह एक सुझाव सा ही समझिये.

हाँ , इस बारे में और जरूर जानना चाहूँगा.

.

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vpshukla Reply:

@Vishvnand, त बहुत शुक्रियाविश्वानन्द जी .आपका बहु ,आपके सुझाव का मैं पालन करूँगा ,
मेरा मानना है की आत्मा मार के शरीर को नहीं बचाया जा सकता .
ये मेरी सोच है ,

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Bahut sunder kavitha, Vijayi.

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vpshukla Reply:

@medhini, bahut bahut dhanyavad.

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very nice….successfully expressed…

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vpshukla Reply:

@rachana, thanks a lot.

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मुझे कविता बहुत पसंद आई…लिखते रहिये :)

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vpshukla Reply:

@prachi, shukriya prachi ji.

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