आस्तीनों में छुरी रख मुंह में रखना राम राम
आईने की आँख से आँखें मिला कर देखिये !
फिर अगर दिल दे गवाही,मुस्कुरा कर देखिये.!
झर पड़ेंगे अंधे जुगनू लाख दामन में अभी
रौशनी के पेड़ ये थोडा हिला कर देखिये.!
आस्तीनों में छुरी रख मुंह में रखना राम राम
इस हुनर में सब हैं यक़ता ,आजमा कर देखिये.!
वक्र होती जायेंगी फिर मूर्ति भंजक दृष्टियाँ
ज़िन्दगी की अनगढ़ी प्रतिमा सजा कर देखिये.!
यूँ सुराबों में भटक कर मंजिलें मिलतीं नहीं
खुरदुरी सच्चाइयों पर चल चला कर देखिये.!
हर तरफ बिखरे पड़े हैं अब जटाओं के तिलिस्म
सोच की भागीरथी नीचे तो ला कर देखिये.!
पर क़तर कर धर दिए हैं ज़िन्दगी की धार ने
देखिये कुछ इन परिंदों को उड़ा कर देखिये.!
4 Comments
बहुत सुन्दर और खूबसूरत
“पर क़तर कर धर दिए हैं ज़िन्दगी की धार ने
देखिये कुछ इन परिंदों को उड़ा कर देखिये.!”
जो लिखा सब आपने पढ़ सोच में दिल पड़ गया ,
ऐसा क्या लिख्खा है, क्या दिल को हुआ, ये देखिये .
siddhanathsingh Reply:
February 8th, 2010 at 3:07 pm
@Vishvnand, तारीफ़ का शुक्रिया परन्तु बाद की पंक्तियाँ क्या कहना चाहती हैं मेरे पल्ले नहीं पड़ा. कुछ और समझायेंगे क्या?

bahut sunder.
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siddhanathsingh Reply:
February 8th, 2010 at 11:44 am
@vpshukla, Thanks Shukla ji.
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