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हम बदले या वो बदले

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Hindi Poetry

जाने हम बदले या वो बदले
या बदल गया वक़्त हमारा
इस अनसुलझी सी कशमकश में
बीता जाये जीवन सारा
जाने हम बदले या वो बदले
या बदल गया वक़्त हमारा

रहता था जिन आँखों को
हर पल इंतज़ार हमारा
फाड़ देते हैं कैसे अब वो
बिना पढ़े पैगाम हमारा
जाने हम बदले या वो बदले
या बदल गया वक़्त हमारा

तारों सी सजती थी महफिलें
लगता तन्हा अब हर तारा
वक़्त की चलती हर सांस को
उनकी यादों से हमने सवांरा
जाने हम बदले या वो बदले
या बदल गया वक़्त हमारा

इक दूजे का साथ मिले तो
निभा लेता हर कोई ये रिश्ता
जुदा होकर ये रस्म निभाए
ना होगा ऐसा कोई सानी हमारा
जाने हम बदले या वो बदले
या बदल गया वक़्त हमारा

दफ़न कर के हर आरज़ू, हर तमन्ना
छुपाकर दर्द सीने में अपना
सजाकर हंसी इन लबों पर
होगा अब तो अपना गुजारा
जाने हम बदले या वो बदले
या बदल गया वक़्त हमारा

13 Comments

  1. Shailesh Mohan Sahai says:

    दर्द भरी इस हकीकत को लाइनों में पिरोने के लिए बहुत-बहुत बधाई.
    शैलेश

  2. Ravi Rajbhar says:

    Very nice…. 🙂

  3. prachi says:

    beautifully portrayed neha,well done 🙂

  4. dr.paliwal says:

    दफ़न कर के हर आरज़ू, हर तमन्ना
    छुपाकर दर्द सीने में अपना
    सजाकर हंसी इन लबों पर
    होगा अब तो अपना गुजारा
    जाने हम बदले या वो बदले
    या बदल गया वक़्त हमारा

    Dil ke dard ko bahut sundarta se shabdon me piroya hai aapne…
    Badhai….

  5. Vishvnand says:

    इक सुन्दर सी रचना
    Dr Paliwal के कमेन्ट से पूर्ण सहमति

  6. Raj says:

    नेहा, रचना का हर पोर दर्द में इस तरह लिप्त है कि हमारे शब्द पलकें भीगी करे खड़े है. बहुत ही सुन्दर बयां लिया है हाल-ए- दिल.

  7. Raj says:

    Typo, ‘लिया’ should be read as ‘किया’, please.

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