« »

मेरे पापा!

0 votes, average: 0.00 out of 50 votes, average: 0.00 out of 50 votes, average: 0.00 out of 50 votes, average: 0.00 out of 50 votes, average: 0.00 out of 5
Loading...
Hindi Poetry

आँखें खोल जब मैं हलके से मुस्काई थी
आपने कहा, देखो बहार की रंगत चढ़ आई है!

खेलते-खेलते जब मैं औंधे मुह गिर पड़ी थी
आपने कहा, देखो फूलो की चुभन तेज़ हो गयी है!

पढ़ते-पढ़ते थक के जब मैं चुपचाप सो गयी थी
आपने कहा, नन्हा पंछी कही छुप गया है!

लड़ते-लड़ते जब मैं जोर से हस पड़ी थी
आपने कहा, बारिश में बिजली चमक रही है!

बोलते बोलते जो मैं यूँ ही रो पड़ी थी
आपने कहा, धूप में मेघ उमड़ आया है!

जाते जाते जब मैं पीछे मुड के देख रही थी
आपने कहा, मेरे बाग़ की कली अब खिल फूल बन गयी है!

दिन बदले, हफ्ते बने
हफ्ते बदले, महीने बने
महीने बदले, साल बने
साल बदले, चका घुमा!

ना आप बदले, ना आपकी मुस्कान
जो है मेरी कविता का मान!

22 Comments

  1. santosh says:

    beautifully portrayed…keep it up.

    Santosh

  2. Shailesh Mohan Sahai says:

    अच्छी अभिव्यक्ति रचना जी
    शैलेश

  3. Ravi Rajbhar says:

    वाह बहुत खूब दिल को छू गई…
    रचना जी बुरा न माने कृपया अपनी प्रोफाइल अपडेट कर hame अपने baren में जानकारी दे …जिससे पता चलता है लेखक किस फिल्ड से है.. 🙂

    • rachana says:

      @Ravi Rajbhar,

      बहुत बहुत धन्यवाद! जी ज़रूर, समय मिलते ही अपना परिचय अपडेट कर दूंगी:-)

      रचना

  4. Vishvnand says:

    सुन्दर रचना बधाई .
    रचना में आपने बहुत खुशी बिखेरी है
    आपने आपने पापा को पा लिया जरूर है …

    • rachana says:

      @Vishvnand,

      बहुत बहुत धन्यवाद! यह कविता मैं अपने पापा को समर्पित करती हु क्यूंकि मैं सिर्फ आज उनकी वजह से यहाँ हू…:-)

      रचना

  5. dr.paliwal says:

    Bahut sundar…..

  6. sushil sarna says:

    beautifully written and explained the inner feelings towards papa-a poem with deep sentiments-badhaaee

  7. shakeel says:

    रचना जी आपकी रचना बहुत खुबसूरत है,एक तस्वीर सी है आपकी ये कविता,

  8. prachi says:

    बहुत मीठी कविता प्यारी अभिव्यक्तियों के साथ…keep sharing 🙂

  9. U.M.Sahai says:

    एक बहुत उत्तम और प्यारी कविता, रचना, बधाई,
    बेटी को पापा से और बेटे को मम्मी से प्यार बहुत है रहता
    यह सिर्फ मैं नहीं कह रहा, सारा जग ही ऐसा कहता

  10. rachana says:

    तारीफ के लिए शुक्रिया..

    शायद यह सही भी हो.. पर मैंने अपने पापा से पहले अपनी माँ के लिए कविता कही थी…

    माँ से बढ़कर तो कुछ नहीं होता ना!

    धन्यवाद!
    रचना

  11. parminder says:

    क्या बात है, मुझे लगता है हर लाडली के दिल की आवाज़ होगी | अति सुन्दर अभिव्यक्ति !

  12. Raj says:

    Sweet. Really a very well composed one. Keep it up Rachana.

Leave a Reply