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महफ़िल-ए-शायर

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Hindi Poetry

अपने लिए जिए तो क्या जिए
दूसरों के लिए जी कर तो देखो
गम के बदले हंसी बाँट के तो देखो
नहीं मिलता हर किसी को सदा मनचाहा
खुशियाँ खुद ही मिल जाएँगी
ज़रा आंसू पी कर तो देखो

12 Comments

  1. Shailesh Mohan Sahai says:

    जीवा जी अच्छा लिखा है.इस महफ़िल में आपका स्वागत है.
    शैलेश

  2. U.M.Sahai says:

    एक सुंदर रचना, badhai jeeva ji

  3. Vishvnand says:

    Nice one.
    & welcome to p4poetry
    Do tell us something more about yourself in your profile.

    देखा देखा बहुत देखा,
    और क्या क्या हम देखें,
    गम के आंसू भी हैं बहुत पिए
    अब खुशी से जाम तो पीकर देखें 🙂

  4. shakeel says:

    जीवा भाई आपकी कविता बहुत पसंद आई
    और आपका स्वागत है यहाँ पर उम्मीद है
    आपकी ऐसी ही रचनाएँ पढने को मिलती
    रहेंगी.

  5. dr.paliwal says:

    achchhi rachna hai…..
    Wel come to p4p….

  6. Raj says:

    Welcome with a good write up.

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