“भिक्षा-वृत्ति”
“भिक्षा-वृत्ति”
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कहता वह किस किस को, जिस जिस को वह कहता है,
कोई सुने या नहीं सुने, वह तो कहता रहता है !
जाता है वह कहाँ कहाँ, वह जहां जहां जाता है,
कुछ न कुछ ले आता है, जब वापस आता है !
जीवन की चक्की को वह इसी तरह चलाता है,
क्या क्या कठिनाई आती है, वह येन केन भुलाता है !
कई बार जब कुछ नहिं मिलता, खाली हाथ चला आता,
केवल तब ही उसको, हे परमेश्वर क्यों याद आता ?
अब वह असमर्थ हो रहl, वृद्धावस्था के कारण,
नहीं समझ पा रहा जीवन का होगा कैसे niवारण ?
अब ही क्यों पछतावा आया, क्यों पहले नहिं याद किया,
उसने उस परमेश्वर को, जिसने hee मानव-जन्म दिया ?
जब वह था समर्थ सबल तब, क्यों न परिश्रम किया कभी,
भिक्षा-वृत्ति क्यों अपनाई, क्यों समझा न इसे तभी ?
कार्यहीनता स्वतः दिखाती कैसा कड़वा फल उसका,
दुष्परिणाम आ धमक बैठता, दोष यहाँ होता किसका ?
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8 Comments
बहुत सुन्दर रचना , और अर्थपूर्ण सन्देश/उपदेश .
इस स्तुत्य रचना के लिए हार्दिक बधाई
शैलेश जी आप जिस वृति की बात कर रहें हैं वो ये भिक्षा-वृति नहीं है …
Bahut Badhiya Rachna hai sirji…..
Badhai….
हमारे समाज के एक बहुत संजीदा मुद्दे पर लिखी यह रचना बहुत सुन्दर लगी.

1) Born: 14-03-1936 (Bikaner-Rajasthan)
2) Caste: Goswami Brahmin.
3) Religion: Sanatan Dharm. (Devotee of Mother Universe-Jagadamba)
4) Status: Pensioner (Retired A.A.O.)
5) Hobbies: Deep devotion, Music (A veteran musician), Chess, Solving
crossword puzzles and writing proses/verses in English,
Hindi, Brij Bhasha etc. A veteran flautist & Synthesizer/Harmonium Wizard.
भिक्षा-वृत्ति कर्यहीनता की द्योतक नहीं है
यह परमेश्वर को प्राप्त करने हेतु अहम् को मिटा देने की शुरुआत है
शैलेश
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ashwini kumar goswami Reply:
January 27th, 2010 at 8:57 pm
@Shailesh Mohan Sahai, I hoe you
may revisit the poem and try to decipher its gist. Thanks.
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