ऐसी कैसी कहानी, ये लिख डाली मैंने…………….
ऐसी कैसी कहानी, ये लिख डाली मैंने ,
दिल प्यार वार करने से,रोकता है मुझको,
दुरसे देखने की, है भले इजाजत,
इकरार करने से,रोकता है मुझको,
जी भरके देखूं उसे, इस नादाँ की भी है तमन्ना,
उठने लगते है कदम, फिर टोकता हैं मुझको,
जानता हूँ मेरे लिए, बुरा नहीं सोचता,पर क्यों,
तनहाई की गहरी खाई में, झोकता है मुझको,
तजुर्बा है इसेभी शायद, किसीकी बेवफाई का,
मौका नहीं दिया था किसीने, इसे अपनी सफाई का,
इसीलिए यह शायद, उससे मिलने से डरता है,
पर सच मानो, मेरा दिल, दिल ही दिल में, उसपे मरता है………2
9 Comments
achcha khayal nd beautiful way 2 express
aaj ki poem rupi kahani ko sun kar to man gardan gardan ho gaya


मैं बहुत बड़े सपने देख कर, उन्हें पुरा करने में बहुत बड़ी कोशिश करके आए, अति अल्प परिणामों से भी
बहुत संतुष्ट होनेवाला, विदर्भ के एक छोटेसे गाँव "इटखेडा" से हूँ, जो नक्शल प्रभावित इलाकों में से एक है, जहाँ के लोगों ने आज़ादी के 50 साल बाद पहली बार "सड़क" देखि. 1973 में इसी गाँव में मेरा जन्म हुआ, माँ मुझे सबसे प्यारी है, पिताजी की शालीनता बहुत भाती है, भाईके गुस्से से डरता हूँ, भतीजों से बहुत प्यार करता हूँ, पत्नी का प्यार जीने की आस है. जलगांव मेरी कर्मभूमि है.
तत्कालीन राष्ट्रपति आदरणीय "डॉ. APJ अब्दुल कलामजी" से काफी प्रभावित हूँ, एक कवि का मन रखने वाले "अटलजी" अच्छे लगते है, "स्व. बाबा आमटे" और उनके बेटे "विकास और प्रकाश आमटे" का कार्य देखने के बाद, समाज कार्य का जूनून मुझपर संवार हो गया. जहाँ किसी प्रकार के वाहन नहीं जातें, ऐसी जगहों पर जाकर भी मैंने मरीजों का मुफ़्त में इलाज किया है. उसीकी वजह से लगता है मेरा धरती पर आना सफल हो गया.
कभी कभी जब मै बहुत दुखी या बहुत खुश होता हूँ, बन जाती है कोई शायरी, या कविता, या गीत.
वाह वाह, मान गए,
बहुत बढ़िया, दिल की बेचैनी और कशिश को समझने और जताने का अंदाज़
बड़ी मनभावन रचना ..
हार्दिक बधाई …
“जी भरके देखूं उसे, इस नादाँ की भी है तमन्ना,
उठने लगते है कदम, फिर टोकता हैं मुझको,
जानता हूँ मेरे लिए, बुरा नहीं सोचता,पर क्यों,
तनहाई की गहरी खाई में, झोकता है मुझको” ..वाह क्या बात है
मेरे एक गीत की याद आ गयी.
“दिल तरसता है तुझे मिलने सनम
दिन रात ये
फिर भी कहता है न मैं तुझसे मिलूँ “.
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dr.paliwal Reply:
January 23rd, 2010 at 7:20 pm
@Vishvnand,
Bahut bahut dhanyvad sirji…..
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