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तुम हो मालामाल………

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Hindi Poetry

घर में मेरे चोरी करने,
आये कल दो डाकू,
माल निकालो कहने लगे वो,
गले पे रख के चाकू,
मैं फकीर मुझे लूटकर,
क्या ले जाओगे,
सारा घर छान मारो,
फूटी कवडी नहीं पाओगे,
फकीरी के हो दम भरते,
क्यों तिजोरी खाली नहीं करते,
हमें ना मिला कुछ तो,
इन्कमटैक्स वालोंको बताएँगे,
हम तो थोड़ेमे मानेंगे,
वह सब समेट ले जायेंगे,
झूठ बोलते, जानते है हम,
तुम हो मालामाल,
इस महंगाई में भी खरीद रहे थे,
कल तुम शक्कर और दाल………..

12 Comments

  1. Neha says:

    very nice thought.

  2. rachana says:

    A great way to highlight a serious issue. Many Congrats!

    Rachana

  3. navin_albela says:

    बहुत खूब ! महँगाई की मार को बहुत चुटीले अंदाज में बयाँ किया है आपने ! रचना के लिए बधाई और ध्न्यवाद !!

  4. Vishvnand says:

    बहुत मार्मिक और हार्दिक रचना
    पढ़कर जो कर देती हर दिल को मालामाल ,
    कहाँ छुपा कर रखते हैं डॉ साहब, आप
    कवित्व और मर्म का ऐसा सुन्दर माल ,
    आप सच में हैं बहुत मालामाल …. 🙂

  5. Ravi Rajbhar says:

    बहुत khub …
    बिलकुल सकी कटाक्श महंगाई और सरकारी तंत्र को…. 🙂

  6. Raj says:

    बिना तीर के दो शिकार, योगेश जी, बहुत अच्छा विचार.

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