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बिग बाज़ार……

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Hindi Poetry

कादिर ने छोड़ी क्रिकेट,
घर में जाकर बैठा,
पहली मैच में सचिन तुमने,
उसको ऐसे पिटा,
एक एक कर बन गए,
तुम बड़े विक्रमवीर,
आदर्श माने तुमको अपना,
सहवाग और गंभीर,
नित नए कीर्तिमान हो रचते,
गेंदबाज धुनाई से नहीं बचते,
खिंचके जब तुम छक्का लगाते,
शेनवार्न के सपने में आते,
कद छोटा पर हर कीर्तिमान को,
कर दिया है तुमने क्षीण,
कोई कहता मास्टर ब्लास्टर,
कोई रन मशीन,
हर प्रकार की उपलब्धि के संग,
तुमने शोहरत पा ली अपार,
क्रिकेटर कम लगते हो तुम,
लगते उपलब्धियों के “बिग बाज़ार” …….

14 Comments

  1. Vishvnand says:

    बहुत बढ़िया कविता और प्रशंसनीय काव्य कल्पना
    सचिन पर ये आपकी है सुन्दर सेंचुरी जैसी ही रचना .
    सच है, सचिन ने लगाया है कितने सारे हज़ार रनों का ये बिग बाज़ार
    जिसमे कितनों ने कमाया है स्पोंसरशिप में जाने कितने करोड़ों का माल..

  2. rajdeep says:

    very true its marvelous

  3. Raj says:

    Well writen Yogesh ji. It will be great if Sachin reads it too 🙂

  4. Sanjay singh negi says:

    DR. ji aapki in paktiyo ka kya kahna
    ek dum uchit samay pr likhi gayi hai poem

  5. parminder says:

    True tribute to the great cricketer. You seem to be a big fan of Sachin’s ! Very well written.

  6. medhini says:

    Bahut sunder kavitha, Dr. Yogesh.

  7. Ravi Rajbhar says:

    mere बेस्ट criketer की तारीफ के लिए धन्यवाद … 🙂

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