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जिंदगी की किताब

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किताबोँ की दुनिया लगती है बडी सुहानी,
वो राजा की रानी, वो परियोँ की कहानी.
पर जिंदगी कि किताबोँ में कहां ऐसी कहानी,
सुखद अंत होना हो गयी बातें पुरानी.
सुख की चाह में बीत गयी सारी जवानी,
दुखोँ में ही अंत हुई यहां की जिंदगानी.
हर पन्ने पर है एक मोड नया,
हर मोड पर है अल्पविराम जरा.
अल्पविराम का ये मतलब नहीं,
कि खत्म हुई कहानी यहीं.
उसी विराम से चला फिर नया रास्ता,
दुखोँ में डूबा फिर पन्ना ,खुशियोँ पर जो था थमा.
गम को दिया विराम,चल पडीं फिर खुशियां,
खुशियोँ, गम का चलता रहेगा युं ही कारवाँ.
जाने किस मोड पर थमें जिंदगी का आशियाँ,
जाने कब खत्म हो जाए स्याही संग जीवन का पन्ना….
राजश्री राजभर

10 Comments

  1. sushil sarna says:

    बहुत सुंदर, बड़ी मनभावन रचना,बधाई

  2. rajdeep says:

    yes it is very nice to read
    loved it

  3. Ravi Rajbhar says:

    very nice…

  4. ck goswami says:

    sundar vichar hai,lekhani me sudhaar hai
    vishay prabhavi hai,sandesh me saar hai
    ———c k goswami fizuriah(UAE)

  5. Vishvnand says:

    इस सुन्दर सी कविता में कही सुन्दर सी बात है ,
    सच ही है कि हर जिन्दगी इक अनोखी किताब ही तो है,
    इस मनभावन रचना के लिए हमारी आपको हार्दिक बधाई भी है

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