किस काम के -जांच आयोग
किस काम के -जांच आयोग
जबसे लिब्राहन आयोग रिपोर्ट आई है
सारे देश में हो रही है एक ही चर्चा
क्यों गठित किये जाते हैं जांच आयोग
और क्यूँ किया जा रहा है इनमे करोडो का खर्चा
सत्रह साल बाद भी हमने , नया कुछ नहीं पाया
जो अब तक सुनते आ रहे थे ,वही इसने दिखाया
राजनैतिक हथियार के लिए ,इनका उपयोग किया जाता है
चुनाव में बस ये मुद्दा बनते हैं, मुर्ख बनाके वोट लिया जाता है
पहले भी कई आयोग बने , उनकी रिपोर्ट पर कुछ ना हुवा
कुछ गर्द लगी स्टोर में पड़ी ,कुछ पे नेता खेल रहे हैं जुवा
.
सन ७७ में बड़े जोर शोर से बना था ‘शाह आयोग ‘
जनतापार्टी ने करना चाहा था इसका दुर्पुयोग
इंदिरा संजय ने निज हित में किया इमरजेंसी में अत्याचार
जिस पर शाह आयोग की रिपोर्ट का था सबको इंतज़ार
किन्तु जब तक रिपोर्ट आती सत्ता जा चुकी थी
और फिर से इंदिरा गाँधी सत्ता में आ चुकी थी
सत्तारूढ़ के खिलाफ हो जांच कैसी
कांग्रेस के सत्ता में आते ही आयोग की हो गयी ऐसी तैसी
सुभाष बोस की मौत की जांचवास्ते बना ‘आयोग मुकर्जी’
२००५ को प्रस्तुत इस रिपोर्ट को सरकार ने ख़ारिज कर दी
क्यूँ किया गया जनता का धन बर्बाद
क्या इसी खर्च पे हजारों बिनघर के नहीं होते आबाद
एक बार भ्रष्टाचार की जांच पर भी फुकन आयोग’ बना
पर ये भी तहलका काण्ड की भाड़ को ना फोड़ पाया चना
एन डी ए सरकार ने आते ही इसे दे दिया अलविदा तोहफा
आयोग बंद किया सी बी आई कोअपने हित में काम सौंपा
चार साल तक करोडो खर्च करके भी हम कुछ ना पा सके
किस नेता ने कितना खाया,ये तथ्य भी हम ना जुटा सके
सिख विरोधी दंगे ‘जैन-बनर्जी आयोग ‘ने जब काम संभाला
तब लगा अब टूटने से बच जायेगा सिखों के सब्र का प्याला
इसी प्रसंग पर नानावती आयोग भी आया
पर रिपोर्ट से पहले ही इसकी ईमारत का ढांचा चरमराया
रिपोर्ट आने तक यू पी ए सरकार में आ गयी थी
कांग्रेसी लपेटे में आये , रिपोर्ट ठन्डे बस्ते में समां गयी थी
राजीव हत्याकांड पर भी जैन कमीशन बना
तमिल नेताओं का हाथ भी इस हत्या में पाया गया सना
पर उनके साथ आज यू पी ए गलबहियां डाल रही है
उनके समर्थन से अपनी सरकार चला रही है
ऐसे आयोग बनाकर जनता की पूंजी क्यूँ बर्बाद की जा रही है
जब रिपोर्ट पर कार्यवाही नहीं तो आयोग क्यूँ बैठा रही है
आयोग का कैसे राजनेतिक दुरपयोग हो रहा है
यह सुनकर आम जनता ही नहीं आयोग भी रो रहा है
नानावती आयोग जब गोधरा काण्ड की जांच में मशगूल था
इसके ऊपर ‘बनर्जी आयोग ‘ आया जो ,लालू का टूल था
एक सरकारी आयोग ऊपर दूसरा आयोग रेल मंत्री लाया था
क्योंकि
कांड को दुर्घटना बता कर चुनाव में उसी ने लाभ उठाया था
राजनेताओं के ऐसे हथकंडे हम कब तक सहेंगे
आयोगों का गठन बंद कीजिये, आज हम सब कहेंगे.
——सी के गोस्वामी(चंद्रकांत)जयपुर
7 Comments
gtr8 work and its a true……
उपयुक्त सामयिक विषय और उसपर सुन्दर, तथ्यों सहित विस्तृत विवरण.
बहुत सुन्दर और प्रभावी कटाक्ष.
रचना की और ऐसे लेखन के प्रयत्न की जितनी प्रशंसा की जाये कम है..
हार्दिक बधाई और धन्यवाद .
ck goswami Reply:
December 16th, 2009 at 2:48 pm
@Vishvnand, aapke andar ek teekakaar pathak aur kavi ka sundar mishran hai atah jab bhi aapki koi tippani milti hai to main use bade dhyan se padhta hun aur usme kee gayee aalochana ka bade dhyaan se anusaran karta hun.aajkal main apne bete ke paas FIJURAIH(UAE)aaya huwa hun.yahin se p4poetry ke sampark me rahne ka prayas karunga.tippani ke liye dhanyawad.

retired bank manager from central bank of india .
wrote few title songs for tv serials.
belongs to bikaner (rajasthan)
present address-51/56 saryu marg mansarovar jaipur 302020
mobile 09785211353
healthy criticism
u r a magician
a player, who can play wid words,
mai chata hu ki aap mujhe bhi acche ki oor agrasar kare mere ko bhi sikhaye aur age badne me madadgar bane,mujhe accha lagega ki aap jaise mahan rachna kar se mai kuch sikh pau atah mai wait kar raha hu aapke comments ka ,i also want critical appreciation form ur side.tht wud help me to compete in the long run.
regards
urs…
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c.k.goswami Reply:
December 10th, 2009 at 8:29 pm
@rajdeep, रा ज दी प जी , आप किसी को इतना भी उंचा न उठाये की वो गिरते ही धडाम हो जाये.प्रशंसा उतनी ही कीजिये जितनी के वो लायक हो,प्रशंसा पा कर आदमी दम्भी हो जाता है और वो निंदा एवं आलोचना नहीं सहन कर पाता,मुझे इससे बचा ही रहने दीजिये. .मैं नित्य कई समाचारपत्र पढता हूँ और उनमे समसामयिक विषयों का अध्ययन करता हूँ और वो ही मेरी कविता की खुराख होती है.प्रकाशित लेखों में समुचित सामग्री मिल जाती है और वो ही मेरी लेखनी को उर्जा प्रदान करती है.प्रेम,प्यार,विरह वेदना पर कविता की जगह मैं सामाजिक बुराइयाँ,राजनैतिक दुरपयोग,आडम्बर,समाज में व्याप्त भ्रष्टाचार पर लिखना ज्यादा उपयुक्त समझता हूँ.कटाक्ष और व्यंग्य मेरे विशेष विषय हैं.आप ने इतना सम्मान दिया,इसके लिए धन्यवाद्. दो माहके लिए मैं अपने पुत्र के पास संयुक्त अरब अमीरात जा रहा हूँ अतः अब दो माह तक आप लोगों के संपर्क में न रह पाउँगा.
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rajdeep Reply:
December 10th, 2009 at 10:58 pm
@c.k.goswami, i thank you sir,
and bon voyage
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