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***दूर न जा पाओगी……***

वहम,

हाँ, 

ये वहम ही तो है 

सच मानो

ये वहम है तुम्हारा 

कि तुम दूर जाकर

इस दिल से 

दूर चली जाओगी  

ये निर्णय लेने से पूर्व

इक बार भी न सोचा

कि ऐसा करके

तुम दिल को

कैसी तड़प की

सौगात दे जाओगी

हर गुजरते लम्हे के 

सीने पर घटा सी

बरस जाओगी

नैन सागर की

इक इक बूँद में

तुम्हारी छवि का

अस्तित्व होगा

फिर कैसे दूर जाकर भी

दूरी बना पाओगी

इसीलिये कहता हूँ

ये तुम्हारा वहम है

तुम दूर जाकर भी

दूरी न बना पाओगी

तुम अगर साथ अपने

राहों की आहटें,

पायलों की आवाज़ें

चूड़ियों की खनखनाहट

उन्मुक्त हंसी की आवाज

फिजाओं में फैले

मुहब्बतों के तराने

मेरे हाथों में छोड़ा

अपने हाथों का स्पर्श

मेरी साँसों में छोडी

अपनी साँसों की अनुभूति

ले भी जाओ

तो भी तुम्हारे लिए

मुझ से दूरी बनाना

मुमकिन न होगा

सच कहता हूँ

मैं तुम्हें

तन्हा उजालों में

घाटी में गूँजती

आवाज़ों में

पहाड़ों के गिरते

झरनों की आवाज़ों में

रात के सुबकते

अँधेरों में

बरसाती पानी की

टप टप करती

आवाज में

आँधियों के शोर में

गलियारों के मोड़ में

छतों की मुँडेर पर

घनघोर घटाओं में

चमकती बिजली में

फूलों की महक में

अपने ख़्वाबों में

जब

मैं तुम्हें पल पल

निहारूंगा

तो तुम ही बताओ

तुम इस दिल से कैसे

दूर जा पाओगी

क्यों,

सच कहता हूँ न

ये वहम है तुम्हारा

कि तुम दूर जाकर

इस दिल से दूर जाओगी

इस सत्य को स्वीकार करो

कि तुम दूर जाकर भी

कभी इस दिल से

दूर न जा पाओगी,दूर न जा पाओगी,दूर न जा पाओगी……

 

सुशील सरना

 

 

4 Comments

bahut khoobsurat kavita hai.

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Thanks a lot Neeraj jee, for such a nice appreciation. In fact, prior to your comment I was under this impression that there is wrong in the poem thats why I could not received any comment, this dipressed me and I decided to delete the same form the board but your comment encouraged me not to delete the poem. Really it is a great pleasure for me to receive comment from great poet like you.Once again thanks a lot.

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बहुत सुन्दर मनभावन रचना
हार्दिक बधाई कि इक आम बीती हुई घटना का आपने इतना सुन्दर भावनिक और काव्यमय चित्रण किया है
.
रही बात कमेन्ट आने या न आने की, तो कई बार मेम्बरों के एक साथ व्यस्त होने से या तो वो कविता पढ़ नहीं पाते या कमेन्ट करने के लिए समय नहीं निकाल पाते. इसी कारण कविता के दर्जे को कमेन्ट मिलने न मिलने के हिसाब से तौलना कई बार अनुचित हो सकता है.
मैं आप की ये कविता आज ही और अभी पढ़ पाया.

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sushil sarna Reply:

@Vishvnand,
आदरणीय वी.आनंद जी, आपकी इस प्यार भरी प्रशंसा ने मेरे मनोबल को प्रोत्साहित किया है. रचना आप जैसे गुणी लोगों की प्रशंसा से और भी निखर गयी है-आपका तहे दिल से शुक्रिया

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