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मैं पराई क्योँ….

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माँ मैं तो हुँ एक परदेसी चिडिया,
ना आऊँगी आपके घर अंगना.
ढुंढा बापु ने मेरा नया बसेरा,
बिन मेरे होगा अब आपका हर सवेरा.
उस डाल को न काटना थी जहाँ आपकी बिटिया,
जाकर ढुंढोगे घर में फिर वही गुडिया.
दिलाएगी हरपल याद मेरी चीजें,
रुलाएंगी फिर मेरी नादानियोँभरी बातें.
सूना हो जाएगा अपका वो घर आंगन,
जहां छमछम पायल मेरी और बजते थे कंगन.
माँ बापु बुला फिर से मुझे पास अपने,
लौटा दो फिर से मेरे वो प्यारे पल,
कर दो अपनी लाडली बिटिया पर यह एहसान.
माँ की गोदी में जब सोती थी रखकर सिर,
सहलाती बालो को मेरे देती ममता अपार,
क्योँ छिना मुझसे मेरा प्यारा संसार.
क्योँ बन गयी गयी थी मैं आप पर बोझ भारी,
क्योँ मेरी खातिर पड गया कम ममता का आंचल ?
भुला दिया कैसे मुझे?थी मैं तो आपकी धडकन.
जानती हुं कि मेरी कमी आपको खलेगी,
पर आपकी कमी तो मुझे सदा ही रहेगी.
गंगा नहा चुके आप दोनोँ करके हमें दान,
क्या हम नहीं उन बेटोँ की तरह् इंसान.
हमें भी तो बनाया है आपने काबिल इतना,
हम भी तो बनते एक दिन सहारा आपका.
क्योँ इस दुनिया की रीत है ऐसी,
दुनिया की हर समर्पण नारी ही करती,
आसओँ से सदा वो अपनी झोली भरती,
क्योँ बेटी, बेटे का दर्जा पा नहीं सकती?
राजश्री राजभर………..

10 Comments

  1. Ravi Rajbhar says:

    क्योँ इस दुनिया की रीत है ऐसी,
    दुनिया की हर समर्पण नारी ही करती,
    Bahut sunder …….ek baat kahu aajki maximum ladkiyan shadi ke bad mayke ana bhi nahi chahti..kyoki unhe ab ye boring jagah lagati hai !
    aapne kavita me ek byahi beti ka dard bakhubi ukera hai…badhai,,

  2. Vishvnand says:

    बहुत सुन्दर रचना.
    एक उत्तम उपयुक्त ह्रदयस्पर्शी और गहन कटाक्ष है विवाह के सम्बन्ध में पुराने रीति रिवाजों पर जिसमे रीति और विचारों में बदलाव लाना बहुत जरूरी है, जिससे कोई कन्या को विवाह के बाद ऐसा महसूस न करना पड़े.
    इस सुन्दर रचना के लिए हार्दिक बधाई …
    पर आज कल तो विवाह के बाद वर और वधु मिलकर अक्सर अपना नया ही घर बसाते हैं जिससे लडके को भी लड़की की तरह अपना मैका छोडना पड़ता है. 🙂

  3. RAMNAYAN RAJBHAR says:

    कविता की RACHNA बहुत SUNDAR है. दिल को ASPARSH करने WALI है अपनी BAATON को बहुत ही सही DHANG से PRASTUT किया है जो COMMENTS मिले हैं, वे सभी सही हैं.

    • rajshree rajbhar says:

      Thank u so much my dear papa. you and mom are god for me and i can do anything for you.thanx for encouraging me..your doughter

  4. rajdeep says:

    rajshree
    what a gre8 piece it is
    loved it

  5. c.k.goswami says:

    कविता में भाव और विचार तो सुन्दर बन पड़े हैं किन्तु ये पद्य से ज्यादा कहीं गद्य का टुकड़ा दिखलाई देता है. पंक्तियों में मीटर का पूरी तरह से आप ध्यान नहीं रख पाई है. आपके विचार अच्छे हैं ,सुन्दर भाव लिए हैं तो उसे सुन्दर रूप में प्रस्तुत भी कीजिये. आपकी विषयवस्तु अच्छी है,विचार सामग्री वजनदार है . “उस डाल को न काटना थी जहाँ आपकी बिटिया
    जा कर ढूंढोगे घर में फिर वही गुडिया ”
    इन पंक्तियों का तारतम्य नहीं बैठता है . हो सकता है आपको मेरा यूँ स्पष्ट लिखना अच्छा न लगे ,पर अगर आपको आपकी कमी की और ध्यान न दिलाया गया तो आप भविष्य में इन कमजोरियों की और ध्यान न दे पायेगी.
    आपके उज्जवल भविष्य की कामना के साथ ___________.

    • rajshree rajbhar says:

      Thank u so much sir muze guide karne ke liye. Muze pata hai i am not perfect aur mai apni galtiya sudharkar apke samne ek sunder prastuti ki koshish karungi bus isi tarah mere guru bankar muze meri galtiya bataya kijiye taki mai unhe sudhar saku. apne meri jis line ke bare me poocha uska arth yahi hai ki mare liye apne ghar ka darwaja usi tarah khula rakhna jis tarah mai shaadi ke pahle thi……..thanks alot sir.

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