| « Sunny Day | Attitude of gratitude… » |
मोहे छोड़ चला तू….
मोहे छोड़ चला तू कहाँ है मनवा
मैं जाऊं पिया के देस
लाग लगी बैरन अंखियों में
राह तकत सूनी
तोसे ओ सखी कासे ये कहूँ मैं
सूरत मन आन बसी
श्याम मिले जो आज न मुझसे
भटकूंगी देस प्रदेस
मोहे छोड़ चला तू …..
मधुबन की कुञ्ज गलिन में आज
छाई क्यूँ वीरानी
छोड़ गया क्या हमको नटखट
गूंजत नहीं धुन मुरली
काटे न काटेंगे दिन बिरहा के
जमना में बहत संदेस
मोहे छोड़ चला तू …..
फाग सखी मैं खेलूं कासे
कान्हा बिन कैसी होरी
मोहन के ही प्रीत रंगी है
मोर चुनर झीनी
दरस दिखा दो नटखट प्यारे
मोरी प्रीत ना लागे ठेस
मोहे छोड़ चला तू कहाँ है मनवा
मैं जाऊं पिया के देस

No Comments
Leave a comment