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२६।११

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‍‍हाल पूछने गये थे आज हम ताज का,
किया स्वागत उसने और छुपाया राज दुखभरे मुस्कान का।
कुछ नया,कुछ जवां ऑर बहुत खुबसुरत सा लगा,
घाव उसके शरीर का भरा-भरा सा लगा,
फिर भी न जाने क्यों वह सहमा सा लगा।
कहा हमसे “शरीर के जख्मों को भरने में महिनों लगे”,
पर दिल के जख्मों को भरने में साल भी कम पड गये।
आज भी हैं ताजी वो दहशतभरी यादें,
संध्या होते ही भयानक लगने लगती हैं रातें।
आज भी हैं दफन सीने में बेगुनाहों की लाशें,
सुन्न कर देती हैं कानों को उनकी चीखें,
उसपल को हो गये थे हम भी अधमरे से।
बचाने को हमें दी अनगिनत वीरों ने कुरबानी,
ग्रेनेड की दहकती लपटों में भी हार न मानी।
पकड आतंकियों को किया पुनःजनम हमारा,
आँसु पोछने को, दिया सारे संसार ने सहारा।
पर हमारी न्यायप्रणाली क्यों इतनी कमजोर निकली,
मेरे गुनेहगारों को क्या मुझसे ज्यादा जिंदगी मिलेगी?
एक कसाब को मारने से आतंकवाद न मरेगा,
जहां पैदा होते हैं लाखों कसाब, उस कारखाने का खात्मा करना होगा,
वरना फिर एक ताज दहशतभरी जिंदगी जियेगा।
जन्म न लेने पाये फिर कोई आतंकवादी,
तभी आतमा को हमारी शान्ति मिलेगी।
वरना हमारी आत्मा हर छब्बीस को इसी तरह कराह उठेगी॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰
राजश्री राजभर

8 Comments

  1. c.k.goswami says:

    “पैदा हुवे लाखों कसाब की बात क्यूँ करते हो,एक तो तुमसे मरा नहीं
    तुम क्या घावों में मलहम लगावोगे उनके जिनका एक जख्म भी अब तक भरा नहीं
    मारना तो दूर एक कसाब पे मुकदमा भी अब तक पूरा नहीं चल पाया
    ताज होटल मुम्बई वीटी दे रहा गवाही कबसे ,यहाँ कौन उनकी आवाज सुन पाया ”
    वक़्त के साथ साथ इस २६/११/०८ को भी लोग भूल जायेंगे ठीक वैसे ही जैसे १९९३ के विस्फोटों कोभूल गए ,याद वही रखेगा जिसने त्रासदी को झेला है और अब तक झेल रहे हैं .

    • rajshree rajbhar says:

      bahut sahi kaha apne hamse to ek kasab bhi nahi mara to atankvadiyo ka khatma kya hoga. Thank u so much sir for your best comments.

  2. sangeeta says:

    पर हमारी न्यायप्रणाली क्यों इतनी कमजोर निकली,
    मेरे गुनेहगारों को क्या मुझसे ज्यादा जिंदगी मिलेगी?

    Sach mein, aaj desh chalanevalon ka ravaiya dekhkar aisa hi lagta hai ki maut ka sannata failanewale aatankvadi ya to aaraam se bachkar nilkal jaate hain, aur agar pakde bhi gaye, to bhi kuch nahin kiya jaata hai sivaay unpar mukadama chalane ke, aisa mukadma jo ki khatma hi nahin hota …..

  3. Vishvnand says:

    अलग सी इस हादसे पर, संवेदनशील, प्यारी सी, ह्रदयस्पर्शी रचना,
    बहुत मनभायी ….

  4. rajdeep says:

    exceptional

  5. Ravi Rajbhar says:

    सच्ची स्रंधान्जली …
    जैसे ताज खुद अपना दर्द देश वासियों से कह रहा हो…!

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