Quick Links: English Poetry | Hindi Poetry | Poetry Podcasts | Editor's Pick | Forum
Email This Poem |

“दौड़ती दौलत”

frat-party

“दौड़ती दौलत”
****************

एकाएक एक अरबपति जब होगया पागल-सा सनकी,
नहीं किसी की सुनता है अब, करता है अपने मन की !
मुनीम को संग लेकर गया वो पञ्च-सितारा होटल,
वहाँ बैठके लगा वो पीने एक के बाद एक बोतल,
मुनीम केवल रहा पूछता बहरे से बिल का टोटल !
थोड़ी-थोड़ी पी पी कर सेठ ने रखदी ढेर सी बोतल,
और लोग बैठे होटल में लगे उठाने ये बोतल !
पीने वालों की बन आई मुफ्त की मौज मानाने की,
मस्त हो गए सारे पियक्कड़, फ़िक्र रही नहीं खाने की !
होटल हो गया बाग़-बगीचा जिसको शराब ने सींचा,
हाथ पकड़ पकड़ के सबने एक दूसरे को खींचा !
लड़खड़ाते मस्त लोगों को देखके मेनेजर आया,
हाथ जोड़-जोड़ कर सबको उसने घर जाने को बहलाया !
सब के सब मदमस्त थे कोई एक भी नहीं बहल पाया !
मेनेजर मजबूर हुआ तब पुलिस को उसने बुलवाया,
कुछ ही देर में विशेष पुलिस-दल होटल-मालिक संग आया,
देख सेठ का चेहरा कोई भी कुछ नहीं कर पाया !
ऐसा दृश्य देखकर लगता दौलत दुनिया को नचाती है,
सरकारी तंत्र हो या जनता हो सबको ही बहकाती है !
जिसके पास हो धन अपार वो ही बस प्रभावशाली है,
निर्धन-जन बस झांकते रहते, ये कैसी बदहाली है ?
धन से ही धन उपजता रहता, निर्धन की जेब तो खाली है,
नहीं है हल इसका, धन की खेती में ही हरियाली है !
बहिष्कार हर स्तर पर यदि धनाढ्य लोगों का हो जाए,
तब ही हो सकता समाधान कुछ, गरीब भी कुछ ले पाए !
धन की असंतुलित सीमा पर अत्यावश्यक है प्रतिबन्ध,
तब ही अपार धन नहीं रहेगा गुप्त खजानों में ही बंद !
ठोस कदम उठाने पड़ेंगे जनता को अपने ही स्तर पर,
धनी लोग तब ही उठेंगे जो बैठे रहते हैं बिस्तर पर !
*************************

6 Comments

बहुत सुन्दर.
पैसे और अमीरी पर सुन्दर विवरण और अर्थपूर्ण कटाक्ष.
बहुत अमीर लोग बहुत से कारणों के कारण दुःख से पीड़ित रहते हैं पर अपनी हार छिपाने के लिए ऐसा कुछ बताने/दिखाने की चेष्टा करते रहते हैं जैसे ज्यादा अमीरी ही Happiness है, जो कतई सही नहीं है, पर उनके दुःख का ही बहुत बड़ा कारण रहता है.

बहिष्कार हर स्तर पर यदि धनाढ्य लोगों का हो जाए,
तब ही हो सकता समाधान कुछ, गरीब भी कुछ ले पाए !
धन की असंतुलित सीमा पर अत्यावश्यक है प्रतिबन्ध,
तब ही अपार धन नहीं रहेगा गुप्त खजानों में ही बंद ! ….बहुत सही कहा है.

इस सुन्दर अर्थपूर्ण कविता के लिए हार्दिक बधाई…. .

Comment on this comment

ashwini kumar goswami Reply:

@Vishvnand,बहुत बहुत हार्दिक धन्यवाद
महोदय ! आपका विश्लेषण भी बहुत प्रभावशाली है !

Comment on this comment

BAHUT SUNDAR AUR DAMDAR RACHNA HAI SIRJI….

Comment on this comment

ashwini kumar goswami Reply:

@dr.paliwal, Thanks a lot, Dr. Sb. !

Comment on this comment

दौड़ती दौलत यूँ ही दौड़ती जाएगी
जितना उसे रोकोगे,वो और तेज गति पायेगी
ये दौलत का नशा है ,इसे नशा ही उतारेगा
घमंड में चूर दौलतमंद को उसका अहंकार मारेगा
एक सुन्दर रचना.

Comment on this comment

ashwini kumar goswami Reply:

@chandrakant, हार्दिक धन्यवाद, प्रिय
चन्द्र कान्त जी !

Comment on this comment

Leave a comment

(required)

(required)

(Press Ctrl+G to toggle between English & Chosen Indian language)