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हुई विदाई सास बहू की


मुक्ति पाई सास बहु से,साज़िश से छुटकारा
विवाहेतर सम्बन्ध नकारे दर्शक ने दुत्कारा
कब्ज़ा सास बहु ने करके लोगों को गुमराह किया
कुटिल चाल षड़यंत्र  दिखा के  किसीका ना उपकार किया
नाम मनोरंजन का बतलाके झूठी गढ़ी कहानी
भव्य सेट साडी जेवर संग कथा कही मनमानी
समझ गए अब सब निर्माता सास बहु व्यापार नहीं
बिन सन्देश के बने  सीरियल ,इन बातों में सार नहीं

लदे हुवे गहनों  साड़ी  पे ,ना महिला ललचाती है
भव्य सेट  ना  नयी डिजायन   किसी का  मन  बहलाती हैं
महिला दर्शक  ऊबी ,  देखा ,  प्रौढ़ का प्रेम जवानी से
नहीं  रहा इंटरेस्ट उन्हें अब ऐसी लचर कहानी से
कुटिल चाल  सम्पति  हथियाना ,बासी कथा हुयी सारी
बहुत बड़े व्यापार घराने  देख चुके  मारामारी
समझ गया अब हर निर्माता ,सीरियल वो चल पायेगा
जिसमे  हो सन्देश कोई सा ,वो  दर्शक को भाएगा
‘उतरन’सीरियल खूब चल रहा ,गरीब सखी दिखलाये त्याग
धनी की बेटी पड़ घमंड में ,सखी के सुख का छीने भाग
‘ना आना  इस देश  में  लाडो ”रिश्ता क्या कहलाता है ‘
नारी को  संकट  में जीने की, नयी  राह  दिखलाता है
देख ‘बालिका वधु’सीरियल बाल विवाह में आई कमी
नारी अत्याचार की घटना ‘विश्व विधाता’ देख थमी
‘अगले जनम मोहे बिटिया ही की जो’देखा तो महसूस किया
नारी है संघर्ष की देवी ,इसने ये सन्देश दिया
पति  पत्नी का ‘पवित्र रिश्ता ‘जन्म जन्म का   होता है
घर ना टूटे  फिर दहेज़ से , लोभ में इन्सां रोता है
‘मितवा’ छोटी  बहू’ ‘विदाई’ सबकोअब तक  लुभा रहे
‘बैरी पिया’   सा बना   सीरियल प्रेम की ज्योत जला रहे
‘मानसिक रोगी बच्चों की’ अंतरा’ में नयी कहानी ‘है
बुद्धि विलक्षण होती उनमे ,हमने इससे जानी है
ख़ुशी हुयी निर्माताओं को,    अब ये  समझ में  आएगा
मनोरंजन  संग सन्देश  हो जिसमे वो ही सीरियल  छाएगा
———-सी के गोस्वामी (चन्द्र कान्त) जयपुर

8 Comments

बहुत सुंदर …….एक अलग विषय पर गजब का लिखा है आपने,,!
badhai…!

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c k goswami Reply:

@Ravi Rajbhar,

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chandrakant Reply:

@Ravi Rajbhar, एक ऐसे विषय पर मैंने कविता likhne का प्रयास किया था जिसे ,ham kayee dino se talash kar rahe the ,बुद्धू बक्शे में सास बहु के कृत्रिम नोक झोंक को कोई कब तक bardasht करता,जायदाद के लिए निम्न स्तर पर गिर कर बुने जा रहे jaal से लोग तंग आ गए थे और चाहते थे की बस अब in banawti कहानियों को विराम लगना चाहिए .लोगो ने सास बहु और जायदाद,उद्योगपतियों के खानदान को नकारना शुरू कर दिया जिसका परिणाम निकला कि अब ऐसे सीरियल पसंद किये जाने लगे जिसमे सामाजिक सुधार की बाते हों और jo संदेशात्मक हों.
कविता जैसी बन पाई वैसा उसका शीर्षक नहीं बन पाया ,मुझे ऐसा लग रहा है की शीर्षक आकर्षक नहीं होने के कारण यह कविता jitne पाठको तक पहुचनी चाहिए थी उतने पाठको तक नहीं पहुच पाई.आपने रचना को पसंद किया इसके लिए धन्यवाद्.

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basant tailang Reply:

@Ravi Rajbhar, वाकई ये एक अलग विषय है ,इस प्रकार के विषयों पर लिखने के लिए न केवल सीरियल्स का पूरा ज्ञान और उसके विषयवस्तु की जानकारी होनी आवश्यक है.यह भी सच है की लोग विवाहेतर समबन्ध,पत्नी के अलावा कई स्त्रियों से सम्बन्ध evam सास बहु की चोंचलेबाजी से तंग आ गए थे.प्रादेशिक पृष्ठभूमि और सामाजिक विषयों पर सुन्दर कहानियों वाले सीरिअल्स दिखाने में जी और कलर चेनल्स आगे आये हैं .इन चंनेल्स को भी बधाई दी जनि चाहिए.

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c k goswami Reply:

@basant tailang, aapne aam teevee darshak ke dard ko pahchana hai ,iske liye dhanyawad.

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अलग सी परन्तु समयिक विषयों पर सुन्दर प्रभावी कवितायें रचना आपका सुन्दर गुण है, और ये कविता भी बड़ी सुन्दर अर्थपूर्ण और प्रभावी है.
TV पर हिंदी सीरियल (जो बिलकुल फालतू होते थे ) देखना मैंने जाने कब से छोड़ दिया है. अब आपकी कविता पढ़ लगता है कुछ सीरियल देखने लायक शायद अब हैं.
रचना के लिए हार्दिक बधाई.

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c k goswami Reply:

@Vishvnand, aapne har baar mere chuninda vishayon par sateek pratikriya dekar margdarshan kiya hai,ye mere liye saubhagya kee baat hai.tippani ke liye dhanyawad.
jin serials ka vivechan kiya gaya kansh serials zee tv aur colors chaaneel prasarit karte hain.marathi prasthbhumi par bana ‘pavitra rishta’ mujhe bhi prabhavit karta hai.

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agar aapko ye rachna gudgudane me safal ho gayee to main sochta hun ki main apne uddeshy me safal ho gaya.hasy rachna ka uddeshy hi yah hota hai ki wo pathkon ko hasaye. dhanyawad.

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