| « पहली बरसी | “गिद्ध दृष्टि” » |
राम चरण मे
राम चरण मे
लगा ले मन
राम चरण में प्रीत ।
सुख.. सम्पति सब
धरी रहत है
यही जगत की रीत।
लगा ले मन
राम चरण मे प्रीत ।
कमलेश कुमार दीवान
१६ मई २००८
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राम चरण मे
लगा ले मन
राम चरण में प्रीत ।
सुख.. सम्पति सब
धरी रहत है
यही जगत की रीत।
लगा ले मन
राम चरण मे प्रीत ।
कमलेश कुमार दीवान
१६ मई २००८
बहुत खूब, बहुत सुन्दर,
और, और कुछ और चाहत है,
मन यूं ही सुनने अपने अन्दर ….
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kamlesh kumar diwan Reply:
November 28th, 2009 at 5:32 pm
@Vishvnand, dhanyand bhai ji
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