एक सलाम २६/११ के शहीदों के नाम
चीर घने अंधियारों को
रक्तिम सूरज की आभा में
दृढ निश्चय के बल को लिए
तुम बढे चलो तुम बढे चलो
बाधाओं के ऊंचे पर्वत
हाहाकार मचा हो सर्वत्र
चट्टानों सा सीना लिए
तुम बढे चलो तुम बढे चलो
तूफानों की ऊंची लहरें
कदम कदम पर मिलेंगे खतरे
वज्र विराट पोत के जैसे
तुम बढे चलो तुम बढे चलो
दांव देश की आन लगी
हर ओर है देखो आग लगी
मुट्ठी भर दुश्मन हैं बैठे
भयाक्रांत सब हो गए जिनसे
हम वो हैं जो कभी ना हारे
क्यूँ मिलकर सब हमको मारें
सहने को अब कुछ ना बचा
जाग तू ऐ हिन्दुस्तानी सच्चा
तेरे दम से दुनिया है रोशन
भागे तेरे पीछे है फोरेन
हस्ती अपनी मिटने ना देंगे
मार के दुश्मन को दम लेंगे
इस प्रण की दृढ़ता को लिए
तुम बढे चलो तुम बढे चलो

अच्छी कविता, अच्छे भाव
sharing के लिए धन्यवाद….
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