अर्पित है श्रद्धांजलि………
२६/११ को जिन्होंने जान गंवाई उन सभी वीरों को अर्पित है श्रद्धांजलि………
काम ना आई दहशत,
तोड़ दिया उनका घमंड,
खत्म कर शैतानो को,
दिया उन्हें उचित दंड,
जिन्होंने जान गंवाई,
उन्हें सलाम हमारा,
बस बहुत हो गया,
फिर ना हो २६/११
वीर जवानों के प्राणों की,
चुकाई हमने कीमत,
फिरसे ‘कसाब’ बनने की,
करे ना कोई हिम्मत,
आतंक से डटकर लड़ेंगे,
है सबने कमर कस ली,
कुर्बानी को ना भूलेंगे,
अर्पित है श्रद्धांजलि………
16 Comments
बहुत आत्मीयता से लिखी आदर भारी श्रद्धांजलि,
प्रशंसनीय रचना और कामना ,
A heartfelt tribute to martyrs of 26/11
इस रचना के लिए सैल्यूट – प्रशंसनीय रचना-बधाई
We will never forget! And we should not…..brilliant ode to the worthy…
एक अति सुन्दर रचना ,जिसे आज ही पढ़ पाया.सुन्दर रचना के लिए साधुवाद.
इस रचना के लिए आपको स-आदर नमन.

मैं बहुत बड़े सपने देख कर, उन्हें पुरा करने में बहुत बड़ी कोशिश करके आए, अति अल्प परिणामों से भी
बहुत संतुष्ट होनेवाला, विदर्भ के एक छोटेसे गाँव "इटखेडा" से हूँ, जो नक्शल प्रभावित इलाकों में से एक है, जहाँ के लोगों ने आज़ादी के 50 साल बाद पहली बार "सड़क" देखि. 1973 में इसी गाँव में मेरा जन्म हुआ, माँ मुझे सबसे प्यारी है, पिताजी की शालीनता बहुत भाती है, भाईके गुस्से से डरता हूँ, भतीजों से बहुत प्यार करता हूँ, पत्नी का प्यार जीने की आस है. जलगांव मेरी कर्मभूमि है.
तत्कालीन राष्ट्रपति आदरणीय "डॉ. APJ अब्दुल कलामजी" से काफी प्रभावित हूँ, एक कवि का मन रखने वाले "अटलजी" अच्छे लगते है, "स्व. बाबा आमटे" और उनके बेटे "विकास और प्रकाश आमटे" का कार्य देखने के बाद, समाज कार्य का जूनून मुझपर संवार हो गया. जहाँ किसी प्रकार के वाहन नहीं जातें, ऐसी जगहों पर जाकर भी मैंने मरीजों का मुफ़्त में इलाज किया है. उसीकी वजह से लगता है मेरा धरती पर आना सफल हो गया.
कभी कभी जब मै बहुत दुखी या बहुत खुश होता हूँ, बन जाती है कोई शायरी, या कविता, या गीत.
will never forget this date ever
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dr.paliwal Reply:
November 28th, 2009 at 6:20 pm
@Parespeare,
Yes & we should not….
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