रिश्तों के धागे
रिश्तों की ये नाजुक डोर
न पड़े कभी कमजोर,
बुनते हैं अपनों के संग सपने
मनभावन ये प्यारे धागे।
सहेजो इन्हें हर पल
न पड़े इनमें कोई बल,
सच्चाई, प्रेम व विश्वास हो गर इनमें
निखर उठेंगे सुमधुर ये धागे।
माना हर आत्मीय अपने से
न हो सकोगे हर वक्त तुम सहमत,
पर मतभेदों से भी चटख न पाएँ
भावनाओं से बँधे ये धागे।

beautiful
loved it
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