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भारत यात्रा
भारत यात्रा
(वर्ष १९५५-५६ में आयी फिल्म “जाग्रति”का एक गाना ५४ साल बाद भी मुझे प्रभावित करता है और उसी को ज़हन में रखते हुवे इस कविता की संरचना की गयी है जब फिल्म में अध्यापक विद्यार्थियों को भारत भ्रमण पर ले जाता है और विभिन्न प्रान्तों की जानकारी देता है .उसी गीत “आओ बच्चो तुम्हे दिखाए झांकी हिंदुस्तान की “” को ध्यान में रखते हुवे इस कविता की सरचना की गयी है फिल्म प्रदर्शन के समय मेरी उम्र ८-९ साल की रही होगी और मैं कक्षा ४ का विद्यार्थी था)
आओ लोगों सैर करा दू तुमको हिंदुस्तान की
झरने नदियाँ पर्वतमाला फैले रेगिस्तान की
मेरा देश महान मेरा देश महान
सुन्दरता जहां भरी पड़ी है ,स्वर्ग की ये तस्वीर है
बर्फीली सौंदर्य छटा से भरा हुवा कश्मीर है
मेरा देश महान मेरा देश महान
अमृतसर की प्यारीनगरी,हिन्दू सिख में प्यार जहां
स्वर्ण मंदिर में जा कर देखो है पंजाब सा प्यार कहाँ
मेरा देश महान मेरा देश महान
सोने जैसी रेत के टीले फैला रेगिस्तान है
महल किले झीलों में बसता मेरा राजस्थान है
मेरा देश महान मेरा देश महान
जैन मंदिर पालीताना के ,पावन द्वारकाधाम जहां
ये गुजरात की धरती प्यारी ,बापू पैदा हुवे जहां
मेरा देश महान मेरा देश महान
फिल्म नगरिया मुम्बई देखो ,बंदरगाह की है रानी
वीर शिवा का महाराष्ट्र जहां दुश्मन ना मांगे पानी
मेरा देश महान मेरा देश महान
मदुरै,रामेश्वर ,कान्चिमठ मंदिर जहां की शान है
भारत के दक्षिण में देखो तमिलनाडु महान है
मेरा देश महान मेरा देश महान
है ये उडीसा मंदिरवाला बिना आरती शाम नहीं
यहीं पे है कोणार्क का मंदिर,जगन्नाथ सा धाम यहीं
मेरा देश महान मेरा देश महान
पेट्रोल और तेल के कुवे ,जहां चाय बागान है
भारत के पूरब में अरुणाचल मेघालय आसाम है
मेरा देश महानमेरा देश महान
साँची के स्तूप जहां पे,खजुराहो अवशेष है
भारत के ह्रदय में बिराजे,ये वो मध्य प्रदेश है
मेरा देश महान मेरा देश महान
जहां बने जलयान विशाखापत्तनम आँध्रप्रदेश में
बालाजी अवतार मिलेंगे, तिरुपति वेंकटेश वेश में
मेरा देश महान मेरा देश महान
सागर तट घने पेड़ नारियल ही केरल की शान है
मोमिन क्रिश्चन हिन्दू संगम मलयाली पहचान है
मेरा देश महान मेरा देश महान
गंगा काशी रामअयोध्या मथुरा जैसे तीर्थ यहाँ
इलाहाबाद संगम की डुबकी बिना लगाये चैन कहाँ
आबादी सबसे ज्यादा है , भैये सारे देश में
भूलभुलैय्या लखनऊ देखो ,है उत्तर प्रदेश में
मेरा देश महान मेरा देश महान
पढ़ी सभ्यता नालंदा की,जो बिहार में आता है
पटना साहिब गुरुद्वारा गुरुवाणी सीख दिलाता है
गया में तर्पण पित्र करो तुम पूर्वज का सम्मान करो
भारत के पहले राष्ट्रपति का ,आके यहाँ पे ध्यान करो
मेरा देश महान मेरा देश महान
बंकिम और टैगोर की धरती ओर काफिला चलता है
बोस बसु से हम बन जाये ,यहाँ पहुँच देख कामना करता है
कोलकाता की भीडभाड में हावड़ा ब्रिज की सैर करो
दार्जिलिंग की छटा देखने में ना अब कोई देर करो
मेरा देश महान मेरा देश महान
भारत यात्रा देश भ्रमण की तुमको यूँ करवा दी है
हर प्रदेश की अपनी खूबी कविता में बतला दी है
————सी के गोस्वामी (चन्द्र कान्त ) जयपुर
12 Comments
बड़ी सुन्दर अर्थपूर्ण मनभावन रचना . बहुत बधाई
Ashwini Kumar ji की स्टाइल में इस रचना का उचित शीर्षक “भारत भ्रमण” होना चाहिए.
रचना पढ़ने में बहुत आनंद आया. आज के माहौल में ऐसी रचनायों और विचार की बहुत जरूरत है, National Integration के लिए जो दिशाहीन होता जा रहा है ..
c k goswami Reply:
November 24th, 2009 at 10:21 pm
@Vishvnand, कविता को राष्ट्रीय एकता का जामा पहनाने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद्.मेरा उद्देश्य ही यही था .
भारत की सुन्दरता की तरह आपकी रचना की सुन्दरता भी अतुलनीय है – बहुत सुंदर रचना- ऐसी महकती रचना के लिए बधाई
c k goswami Reply:
November 24th, 2009 at 10:21 pm
@sushil sarna, आपको भी इस सुन्दर टिपण्णी के लिए ह्रदय से धन्यवाद्.
aur maine ishe pure geet ke lay me ga ke padha…
bahut hi sunder rachna hai….pure bharat ki sair kara di aapne..!
c k goswami Reply:
November 24th, 2009 at 10:23 pm
@Ravi Rajbhar, लय में गाने के बाद तो इसका आनंद और भी बढ़ जाता है.आपने इस रचना का आनंद लिया इसके लिए शुक्रिया.
Bahut hi sundar rachna, is desh ki mahanta ka bakhan bahut achchhe tarike kiya hai aapne……Maja aa gaya padhkar….
Is behtarin rachna ke liye hardik badhai…..
c k goswami Reply:
November 24th, 2009 at 10:27 pm
@dr.paliwal, पालीवालजी आपकी रचना जिस प्रकार राष्ट्रीय भावनाओं से ओत प्रोत होती हैं वैसी ही इस रचना को बनाया गया है.आपको पसंद आयी इसके लिए धन्यवाद्. ऐसी ही कवितायेँ और गीत हम बचपन में पढ़ा करते थे किन्तु आज शिक्षा पाठ्यक्रमों से ऐसी रचनाएँ लुप्त हो गयी हैं ,यह देश के नौनिहालों का दुर्भाग्य नहीं तो और क्या है?
atyant hi sundar rachna – bada khoobsoorat bharat bhraman karvay aapne in panktiyon dwara.
c k goswami Reply:
November 25th, 2009 at 1:08 pm
@sangeeta, संगीताजी आपकी मेरी काव्य रचनाओं पर प्रथम टिपण्णी है ,इसके लिए धन्यवाद्

retired bank manager from central bank of india .
wrote few title songs for tv serials.
belongs to bikaner (rajasthan)
mobile 09785211353
यह भी बता देते इस देश में कितनी आबादी है,
पग-पग में पाबंदी है, फिर कैसी ये आज़ादी है ?
एक ओर जा रही है अर्थी, एक छोर पर शादी है,
बूढ़े हैं माँ-बाप साथ में बूढ़े दादा-दादी हैं !
इसी बीच किसीने टीवी पर फिल्म चलादी है,
फिल्म के बीच टीवी ने एड्स की झड़ी लगादी है !
नन्हे-मुन्ने बच्चों ने बस दूध की रट लगादी है,
खिड़की से ताकती बिल्ली को लाठी दिखा भागादी है !
धोबी कपडे धोकर लाया उसमें इक पेंट जलादी है !
खेलते-खेलते बच्चों ने घर में मिट्टी फैलादी है !
समझ नहीं आता यह आज़ादी या बरबादी है ?
प्रिय चंद्रकांत जी, आपका बहुत समय लेलिया और आपकी सुन्दर रचना पर
सितारे अंकित करना तो आवश्यक है ही ….
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c k goswami Reply:
November 24th, 2009 at 10:18 pm
@ashwini kumar goswami, आपकी काव्यात्मक टिपण्णी के लिए धन्यवाद्.
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