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मुफ्त की सलाह ना दीजिये……

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Hindi Poetry

‘हिंदी चीनी भाई भाई’ का, लगाते है वो नारा,
झांसे में नहीं आनेवाला, हिंदुस्तान दोबारा,
मुह में ‘राम’ बगल में ‘छुरी’, ऐसी है करतूत,
चीन की मध्यस्थी क्यों, चाहे अमरीकी यमदूत,
हाथ पांव है सलामत, रख सकते है खयाल,
‘कश्मीर’ पाक को सौपने का, क्या बुन रहे हो जाल,
आपकी की मध्यस्थी मांगने की, हुई थी हमसे भूल,
फूलो की उम्मीद रखी थी, बिछा रहे क्यों शूल,
भूल गए क्या आपने ही, दुनिया को दिया था लादेन,
जिसने चुराया बादमे, आपका ही सुख चैन,
पाक और चीन को, ना सर पे बिठाइए,
हमें नहीं जरुरत इनकी, अपने घर ले जाइये ,
औंधे मुह से गिर जायेंगे, अब भी संभल लीजिये,
जब तक मांगे ना कोई, मुफ्त की सलाह ना दीजिये……

14 Comments

  1. Vishvnand says:

    बहुत खूब, बहुत बढ़िया,
    इस सुन्दर भावनिक रचना का मैंने, उठ खड़े हो, ताली बजाकर सन्मान किया है.
    इस रचना के लिए आपको सहर्ष बधाई.

    • dr.paliwal says:

      @Vishvnand,
      सरजी आप जैसे अनुभवी और मंजे हुए कवी की इतनी सुन्दर प्रतिक्रिया मेरे लिए किसी अवार्ड से कम नहीं…………
      बहुत बहुत धन्यवाद…………..

  2. ashwini kumar goswami says:

    प्रतीक्षारत चुपचाप खड़े थे ये भूंखे ५-सितारे,
    ऐसी सुन्दर साहित्यिक रचना से तृप्त हुए बेचारे !
    अमरीका अतिसंतुष्ट है, ऐसे जाल रचाता सारे,
    भारत की उन्नति की जब होती वारे वारे !

  3. c k goswami says:

    “किसने बनाया पञ्च तुमको ,मांगी थी कब सलाह
    अमेरिका चाहने लगा सर्व विश्व में हो वाह……
    मांगेबिना सलाह अब वो देना छोड़ दे
    मानेगे अपना दोस्त , हमरे शत्रु से नाता वो तोड़ दे ”
    डाक्टर पालीवाल की एक सुन्दर रचना.

  4. Parespeare says:

    beautiful poem Paliwalji

  5. sangeeta says:

    Wonderful comment on a very current topic and a worrisome occurrence for India. Presented very beautifully some of the (mis)deeds of America, the so-called self-appointed “saviour” of the world who in many cases is actually responsible for the “ills” thrusted upon the world.

  6. Ravi Rajbhar says:

    wow……
    I have no word for comment this wonderful poem….
    Aur itani badi rachna ke liye sitaro ki ginti nahi karte**************

  7. rajdeep says:

    kya baat hai janaab
    behat acchi

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