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खुदगर्ज़ इंसान

खुदगर्ज़ इंसान

लोग किसी की अंतिम यात्रा में ,कैसी औपचारिकता निभाते हैं
गम जताने का नाटक करके अपनी कुटिल मुस्कान छिपाते हैं
आयेंगे ये बतलाने को ,मरनेवाला हमारा ख़ास था
हर दुःख दर्द में वो रहता उनके पास था
उसके जाने से उन्हें  बहुत अफ़सोस है
उसके  बिना अब ज़िन्दगी में ख़ुशी है ना जोश है
फिर कुछ देर बाद अफ़सोस करनेवाले का नया रूप  सामने आता है
औपचारिकता का अध्याय ख़तम हो जाता है
बात आती है जवां विधुर की,जिसकी जवां बीबी अभी मरी थी
अभी तो जिंदगी  लम्बी बड़ी है
इस बेचारे की पूरी ज़िन्दगी पड़ी है
कैसे बिन बीबी के जीवन गुजारेगा
अकेला कैसे बेटे का भविष्य संवारेगा
जवान है बिन  औरत के कैसे वक़्त  गुजारेगा
इधर उधर मोहल्ले में मुह मारेगा
क्यों ना ये शादी फिर से कर ले
अपनी खाली  जिंदगी को  भर ले
अच्छी भली नौकरी है ,कोई भी लड़की मिल जाएगी
ज़िन्दगी है उजड़ी ,नयी बीबी से बस जाएगी
तभी ज़नाज़े में साथ चल रहा एक व्यक्ति बोला
“खाता कमाता है  ,आप अपनी लड़की क्यों ना ब्याहते ?”
“ये सच है लड़की तो मेरी भी शादी लायक है ,और हम  भी ऐसा चाहते ”
तीये की बैठक बाद चलाएंगे बात
शवयात्रा में भी शादी  की  हो गयी  शुरुआत
कैसा गम ?कैसी दोस्ती? कैसी यारी
आज की यही औपचारिकताहै और यही दुनियादारी
ये  देख सुन के मेरा मन रोता है
क्या  हर इंसान  ऐसे ही खुदगर्ज होता है
——- सी के गोस्वामी (चन्द्र कान्त) जयपुर

8 Comments

Amazing. Have seen the same in TV plays but not in real. Sad if it is so.

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बहुत प्रभावी कटु सत्य जताया गया है और ऐसी वस्तुस्थिति और विपर्यास पर भेदक कटाक्ष है .
प्रशंसनीय रचना

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chandrakant Reply:

@Vishvnand, आपकी हर टिपण्णी मुझमे नयी उर्जा का संचार करती है.आपकी सारगर्भित टिपण्णी मुझे प्रेरित करती है कि मैं समाज के दोहरे चेहरे को उजागर करूँ.शव दाह के समय मैंने लोगों को बतियाते और चुटकले सुनाते bhi करीब से देखा है . ऐसी aupcharikta ham kab tak nibhate rahenge.

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राजजी,मैंने एक शवयात्रा में ऐसा ही कुछ देखा था और यहीकारण है कि मैं इस वृतांत को कविता के रूप में उतार पाया.
मैं ऐसा सब कुछ हर इंसान के बारे में नहीं सोचता पर जैसा एक दो खुदगर्ज़ लोगों को देखा तो मन इस वृतांत लिखने को मचल गया.दुनिया में ऐसे kayee खुदगर्ज़ इंसान मिल जायेंगे जो इस tarah कि औपचारिकता निभाते hain.

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Aisa aajkal aksar hota hai…..
Aisi ghatnaon par itne prabhavi tarike se likhne me aap mahir hai….
Bahut badhai…….

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c k goswami Reply:

@dr.paliwal, पालीवालजी आपने भी इस दिखावे की औपचारिकता देखा है.ऐसा हम सभी देखते हैं किन्तु इन विषयों को कम ही लोग छूने का प्रयास करते हैं,मैंने इस पर लिखने का प्रयास किया और आप लोगो ने मेरे इस प्रयास पर सार्थक प्रतिक्रिया दी,इसके लिए धन्यवाद्.

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ऐसी सच्चाई लिखने का साहस बहुत कम लोग करते हैं, आपने किया निस्संदेह यह एक साहस भरा कार्य है जो समाज के खुदगर्ज़ इंसानों को बेनकाब करता है.

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C K goswami Reply:

@basanttailang bhopal, dhanyawad.

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