Quick Links: English Poetry | Hindi Poetry | Poetry Podcasts | Editor's Pick | Forum
Email This Poem |
« »

कैसी बीत रही है

कैसी बीत रही है

मै अचछा हूँ
आप बताये
कैसी बीत रही है ।

घर आँगन
सूना सूना है
खाली खाली दिन और रात ,
अपने है सब
रूठे रूठे
कही न कोई ऐसी बात
मै बचता हूँ
आप बताये
कैसे जीत रही ।

क्या तुमने
माँ बाबा के बीच
सुलह करबाई है
बहन भाई के बीच
हुई क्यों
मार पिटाई है ,
क्या कक्षा में
डाँट पड़ी या
फिर मौसम की मार
क्या बस्तो के बोझ तले
हो रही पढाई है ।

मै अच्छा हूँ
आप बताये
कैसे सीख रहीं है
कैसे बीत रही है ।
कमलेश कुमार दीवान
१३ अगस्त २००९

3 Comments

Amazing. बहुत ही सुन्दर रचना कमलेश जी. I really like the style.

Comment on this comment

बहुत सुन्दर, प्यारी मनभावन रचना,
हार्दिक बधाई और posting के लिए धन्यवाद
कविता के सन्दर्भ में पंक्ति “कैसी बीत रही है” अंतर्मन में बहुत ही संवेदनशील माहौल जगा जाती है ….

Comment on this comment

Bahut sundar rachna hai….

Comment on this comment

Leave a comment

(required)

(required)

(Press Ctrl+G to toggle between English & Chosen Indian language)