दर्दे-दिल
दर्दे-दिल
मुझसे तो ज्यादा बेवफा आप निकले
मैंने तो किसी का दिल न तोड़कर भी बेवफा का ख़िताब पाया
पर,आपने तो दिल तोडा कईयों का फिर भी वफाई का तोहफा पाया
मुझपे तोहमत लगाई दुनिया ने,प्यार करके मैंने तुमसे क्या पाया
टूटे हुवे दिल न समझ पाए तुम्हारी ये चालाकियां
मासूम बनके तुमने कईयों के दिल में बनाई थी जगह
खुशियाँ तो न मिल पाई उनको , दर्दे-दिल के नए रोग से तडफाया
———–बसंत तैलंग भोपाल
10 Comments
bahut khoob….
Wel come to p4p…..
c k goswami Reply:
November 18th, 2009 at 10:59 pm
@dr.paliwal, aapne hamara swagat kiya,ham aapke mapdand par khare utrenge.
अच्छी कविता. दर्दे दिल की
p4poetry पर आपका स्वागत,
“हसीनो से तुम जो वफ़ा चाहते हो,
बड़े नासमझ हो, ये क्या चाहते हो….!”
बहुत अच्छे ढंग से लिखी इस संक्षिप्त रूप से हृदयस्पर्शी शायरी के लिए बहुत बहुत
बधाई ! इस मंच के माध्यम से अपनी लेखन-कला को और विस्तार देने मैं आपकी
रूचि हो जाये तो स्वागतयोग्य है ! पहली गेंद पर ही छक्का लगाने पर आपको पांच
सितारे देना वांछनीय है !
basanttailang bhopal Reply:
November 19th, 2009 at 8:18 pm
@ashwini kumar goswami, आपने सिक्सेर बताकर मेरे कंधो पर आगे अच्छा खेलने का बोझ डाल दिया है.कोशिश करूँगा.,आपके मापदंड में खरा उतरू.धन्यवाद .
हसीनों से एहदे वफा चाहते हो
बड़े ना समझ हो ये क्या चाहते हो
तैलंग जी, आपकी रचना सराहनीय है, मंच पे तालियों से आपका स्वागत है

“मासूम बनके तुमने कईयों के दिल में बनाई थी जगह
खुशियाँ तो न मिल पाई उनको,दरेदे दिल के नए रोग से तडफाया”
बहुत खूब ,क्या बात कही आपने ,सही कहा बेवफा तो दिल का दर्द देनेवाला ही होता है.
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c k goswami Reply:
November 18th, 2009 at 10:58 pm
@c k goswami, dhanyawad
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