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अच्छा सिला दिया उसने इजहारे मुहब्बत का…….
अच्छा सिला दिया उसने इजहारे मुहब्बत का,
मै “शायर” कम “शराबी” “मिर्ज़ा” ज्यादा नजर आता हूँ,
कहकर मुझे ठुकरा दिया….
छलकाए जाते है वह भी तो पैमाने सरेआम,
महफिले उनकी कैसे दुरुस्त नजर आने लगी?
डोली जा रही है उस बेमुरव्वत की उन्ही के घर,
रातें जिनकी मैखानों में गुजर जाती है………
14 Comments
मै “शायर” कम “शराबी” “मिर्ज़ा” ज्यादा नजर आता हूँ,
broke into laughter reading this line
-:)
dr.paliwal Reply:
November 19th, 2009 at 11:49 am
@Parespeare,
धन्यवाद….!
जीहाँ, परन्तु इस एक लाइन के बिना रचना आगे नहीं बढती….
Bahut sunder, Dr. Yogesh.
मजा आ गया, डॉ जी ऐसी रचना पढ़ कर
वाह-वाह…
बहुत khub …… तो जनाब आप 49 दिनों से…
“शायर” कम “शराबी” “मिर्ज़ा” ……………
लगा मैं kavi sangothi में हूँ…..बधाई..

मैं बहुत बड़े सपने देख कर, उन्हें पुरा करने में बहुत बड़ी कोशिश करके आए, अति अल्प परिणामों से भी
बहुत संतुष्ट होनेवाला, विदर्भ के एक छोटेसे गाँव "इटखेडा" से हूँ, जो नक्शल प्रभावित इलाकों में से एक है, जहाँ के लोगों ने आज़ादी के 50 साल बाद पहली बार "सड़क" देखि. 1973 में इसी गाँव में मेरा जन्म हुआ, माँ मुझे सबसे प्यारी है, पिताजी की शालीनता बहुत भाती है, भाईके गुस्से से डरता हूँ, भतीजों से बहुत प्यार करता हूँ, पत्नी का प्यार जीने की आस है. जलगांव मेरी कर्मभूमि है.
तत्कालीन राष्ट्रपति आदरणीय "डॉ. APJ अब्दुल कलामजी" से काफी प्रभावित हूँ, एक कवि का मन रखने वाले "अटलजी" अच्छे लगते है, "स्व. बाबा आमटे" और उनके बेटे "विकास और प्रकाश आमटे" का कार्य देखने के बाद, समाज कार्य का जूनून मुझपर संवार हो गया. जहाँ किसी प्रकार के वाहन नहीं जातें, ऐसी जगहों पर जाकर भी मैंने मरीजों का मुफ़्त में इलाज किया है. उसीकी वजह से लगता है मेरा धरती पर आना सफल हो गया.
कभी कभी जब मै बहुत दुखी या बहुत खुश होता हूँ, बन जाती है कोई शायरी, या कविता, या गीत.
डॉक्टर साहब. बहुत खूब,
रचना ये हसीन दवा सी नजर आती है,
हुस्न, शराब नशा और शायरी
मुहब्बत में ऐसे ही गुल खिलाती है …!
बधाई …
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dr.paliwal Reply:
November 19th, 2009 at 11:29 am
@Vishvnand,
Bahut Bahut Dhanyvad Sirji…..
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