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मन की कवितायें ….!

मन की कवितायें ….!

ये  कैसी  दुविधा में  मैं और मेरा मन आजकल  आन पड़े  हैं .

कुछ  लिख  नही  पा  रहा,  जैसा  हरदम लिख पाता था,

ऐसा लगता है  जैसे  मन से  लिखना  ही  नहीं   आता ,

मन  कुछ  कह  रहा  है,  किसी  उलझन  में  खोया  है,

जो  कहना  चाहता  है,  ठीक  कह  नही  पाता,

इसीलिये  जो   मैं  लिखता  हूँ,  वो  मुझे  ही  अच्छा  नहीं  जचता,

और  जैसा  लिखना  चाहता  हूँ  वो  लिख  ही  नहीं  पाता,

मगर  मुझे  मालूम  है,  मेरे  मन  अन्दर  कहीं  कुछ  हुआ  जरूर  है,

कुछ  तूफ़ान  या  सैलाब  का  मौसम  सा  वहां  उभर  रहा  है,

जो  मन  को  ही  शायद   कुछ  ठीक  समझ नहीं आ रहा है.

और  मैं खुश हूँ, मुझे  मेरे मन पर  पूरा  विश्वास  है  और  मुझमे  सब्र  भी ,

खुद  के  दिल  से  प्यार  और  इस  मन की गहराई  पर  नाज़  भी ,

कि  जल्द  ही  पहले जैसा  संवेदनाओं  का  सागर  मन  में  उमड़  पडेगा,

और  तब  मन,  एक  से  बढ़कर  एक,  भावनाओं   का  वर्षाव  मुझपर  करेगा,

जो  मैं  खुद  पर  प्रभु की असीम कृपा और भाग्यवान  समझ  महसूस  करता  रहूँगा.

बहुत  खुशी से इन सुख और दुःख की लौकिक  भावनाओं के सैलाब के  अनुभव  में खोता रहूँगा,

और  बन  सका  तो  लिखकर इन्हें  मेरे  मन  की  कवितायेँ  बना  जरूर  प्रस्तुत  करता रहूँगा….!

—- ” विश्व नन्द ” —-

12 Comments

Bahut saral, sundar shabdon me jaise aapne mere hi manki baat likh di hai sirji….
Yah rachna mujhe bahut pasand aayi…..
badhai ho sirji…..

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Vishvnand Reply:

@dr.paliwal
आपके कमेन्ट का बहुत शुक्रिया.
हाँ, यहाँ p4poetry पर हम एक दूसरे के मन के प्यार और व्यथा को अब पहचानते जो हैं और बाँटते भी हैं….

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आपने इस कविता में बहुत कुछ लिख दिया .सच ही कहा है कविता का जनम मन से ही होता है.

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Vishvnand Reply:

@c k goswami
आपकी प्रतिक्रया का बहुत शुक्रिया

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i could relate to the poem, hadn’t written in a long time

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Vishvnand Reply:

@Parespeare
Thanks for the comment.
Yes we all go through this phase often. My point is only that we should enjoy this phase also, happily with patience and profound expectations.

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बहुत सरल परन्तु गहन अध्ययन पूर्ण सुन्दर रचना.

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Vishvnand Reply:

@Raj
आपकी इस सुन्दर प्रतिक्रया के लिए हार्दिक आभार

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A very beautiful poem on ‘man ki baath’
and an obscure mind, Vishvji.

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Vishvnand Reply:

@medhini
Thank you so very much for your comment

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बहुत सुंदर ढंग से आपने अपने अन्तर्द्वन्द को शब्दों में चित्रित किया है,रचना की मूल आत्मा रचना की संरचना है जिसे मुझे पूरा यकीन है कि आप संवेदनाओं की ओढ़नी पहना कर प्रस्तुत करेंगे- रचना के लिए हार्दिक बधाई

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Vishvnand Reply:

@sushil sarna
आपकी सुन्दर टिप्पणी का सहर्ष आभार .

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