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अच्छा सिला दिया उसने इजहारे मुहब्बत का…….

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Hindi Poetry

अच्छा सिला दिया उसने इजहारे मुहब्बत का,
मै “शायर” कम “शराबी” “मिर्ज़ा” ज्यादा नजर आता हूँ,
कहकर मुझे ठुकरा दिया….
छलकाए जाते है वह भी तो पैमाने सरेआम,
महफिले उनकी कैसे दुरुस्त नजर आने लगी?
डोली जा रही है उस बेमुरव्वत की उन्ही के घर,
रातें जिनकी मैखानों में गुजर जाती है………

14 Comments

  1. Vishvnand says:

    डॉक्टर साहब. बहुत खूब,
    रचना ये हसीन दवा सी नजर आती है,
    हुस्न, शराब नशा और शायरी
    मुहब्बत में ऐसे ही गुल खिलाती है …!
    बधाई …

  2. Parespeare says:

    मै “शायर” कम “शराबी” “मिर्ज़ा” ज्यादा नजर आता हूँ,
    broke into laughter reading this line
    -:)

    • dr.paliwal says:

      @Parespeare,
      धन्यवाद….!
      जीहाँ, परन्तु इस एक लाइन के बिना रचना आगे नहीं बढती….

  3. Raj says:

    सही है, योगेश जी. अच्छा प्रयास है.

  4. medhini says:

    Bahut sunder, Dr. Yogesh.

  5. sushil sarna says:

    मजा आ गया, डॉ जी ऐसी रचना पढ़ कर

  6. Ravi Rajbhar says:

    वाह-वाह…
    बहुत khub …… तो जनाब आप 49 दिनों से…
    “शायर” कम “शराबी” “मिर्ज़ा” ……………
    लगा मैं kavi sangothi में हूँ…..बधाई..

  7. sangeeta says:

    Bahut khoob!

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