प्रिया मेरी इक खोज हो तुम

प्रिया मेरी इक खोज हो तुम
कुछ जानी कुछ अनजानी सी
ख्वाबों में धुन्धलाया चेहरा
कुछ जाहिर कुछ खोया खोया
छूना चाहूँ छू न पाऊँ
छवि जैसे हो पारे की
प्रिया मेरी इक खोज हो तुम
कुछ जानी कुछ अनजानी सी
ढूंढा तुझको अंतर्मन में
नरमुंडों के वीरानों में
दिखेगी तू उस भीड़ में भी
सबसे अलग अकेली सी
प्रिया मेरी इक खोज हो तुम
कुछ जानी कुछ अनजानी सी
बोझिल अँखियाँ आशा मन में
बैठा हूँ इंतज़ार में अब मैं
वह मोड़ जहाँ पर मिलेगी तू
मुझको बाहें फैलाये सी
प्रिया मेरी इक खोज हो तुम
कुछ जानी कुछ अनजानी सी

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