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rahin suraten to nazar me bahut

मिले खैरख्वाह यूँ शहर में बहुत
न थी खैरियत सिर्फ घर में बहुत
तुम्हारी सरीखी न कोई मिली
रहीं सूरतें यूँ नज़र में बहुत
सभी मुब्तिला एक डर में बहुत
थे मसरूफ तेगोतबर में बहुत
कहाँ से चले और कहाँ आ गए
रहे लोग अक्सर अधर में बहुत
सदफ ने न कतरों से पूछी रज़ा
फ़क़त ढाल डाला गुहार में बहुत
अभी जीस्त के मरहले और हैं
न रुकना किसी एक दर में बहुत
सितारे कई और गर्दिश में हैं
जिया गो है शम्सोक़मर में बहुत
तबस्सुम को गुंचे तरसते रहे
बहारो खिजां के असर में बहुत

5 Comments

कठिन शब्द उर्दू के इसमे बहुत.
मगर नज़्म भायी है दिल को बहुत …

कठिन उर्दू लफ्जों के माइने भी दें,
तो आवे समझने का मज़ा भी बहुत ….!

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अभी जीस्त के मरहले और हैं
न रुकना किसी एक दर में बहुत

bahut khoob….. acchi gazal hui hai sir….

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thanks. aage se dhyan rakhunga ki lafjon ke maiene bhi de dun. vaise lafj ke maani vahi hain jo aadmi samajh le anyatha to lafj langde aur arth adhure hote hain-s.n.singh

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गुहार नहीं गुहर है यानि कि मोती – एस.एन.सिंह

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मुब्तिला – व्यस्त, तेगो तबर – तलवार भला आदि , सदफ- सीप, गुहर -मोती जीस्त – ज़िन्दगी ,मरहले- परिस्थितियां, लक्ष्य शम्शोक़मर-चाँद तारे गुंचे-फूल , – एस एन सिंह ,

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