शिद्दते दर्दो आह ना पुछो कोई मेरे दिल से…..
इस आलम में जिंदा हूँ मैं बड़ी मुश्किल से
सयाहरूख हुए जो रौशन ख़्याल थे इस कदर (सयाहरूख-काली सूरत वाले)
जिस्मो रूह जले हैं तारों के इस झिलमिल से
आँखों में सजी है अब भी उसी की एक सूरत
डाल दे मुझपर कफ़न कोई कहे मेरे क़ातिल से
वो चल दिए मैं दूर तक उन्हें देखता रह गया
बाँध सका है कौन यहाँ लहरों को साहिल से
आईने सारे झूठ बोलने लगे हैं मेरे शहर के
या बिछड़ के हुए हो तुम मुझमे शामिल से
मेरे क़दमो से धड़का था सिने में जिसके दिल
आज गुज़रे हैं सारे राह मुझसे वही गाफ़िल से (गाफ़िल-अनजाने से)
क्यों ना टुटा आसमान ये ज़मीं क्यों ना पिघली
सोचते यही निकले थे रात हम तेरी महफिल से
तौबा- तौबा कीजिये इन परी जमाल चेहरों से (परी जमाल- परी जसिसे चेहरे वाले)
सबक कुछ तो ले लो दुश्मनों मेरे हासिल से
रहज़न ही जब मिले रहबरों का चेहरा लिए हुए (रहज़न-रास्ते के लुटेरे)
गिला क्या रास्तों से हमे शिकवा क्या मंजिल से
पशेमान वो है ग़मज़दा तू भी नज़र आता तो है (पशेमान-शर्मिंदा)
है दिन खुदा ईद का गले मिल आओ शकील से

“आईने सारे झूठ बोलने लगे हैं मेरे शहर के
या बिछड़ के हुए हो तुम मुझमे शामिल से”
waah! humeshaa ki tarah bahut khoob gazal hui hai shakeel ji…. bahut hi khoob….
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Priyal Reply:
November 9th, 2009 at 8:13 pm
@vartika, I’m amazed vartika, how do our favorite lines always match..
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vartika Reply:
November 9th, 2009 at 8:18 pm
@Priyal, long bck u said dat we share something in common… no not wat it is… but still… shayad kuch ho…
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