समंदर सी मिली दिलफरेब किस्मत…..
किससे कहें रहबरों मुश्किलें अपनी
खोई कहीं राहों में मंजिलें अपनी
खोई कहीं राहों में मंजिलें अपनी
समंदर सी मिली दिलफरेब किस्मत
साहिल से लौटा ढूंढ साहिलें अपनी
रौशनी सारी समेट वो गए शकील
शमे कुश्ता से सजाओ महफिलें अपनी (शमे कुश्ता- बुझी हुई शम्मा)

हमेशा की तरह बहुत ही उम्दा.
Comment on this comment