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***कैसे हो तुम राम….***

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है राम, कैसे हो तुम राम
बिगड़ी बनाते सब की
मेरी भी सुध लो
दीप जलाऊं सुबह शाम
है राम, कैसे हो तुम राम…..
तुम न सुनोगे तो
फिर कौन सुनेगा
मेरी विपदा कौन हरेगा
कैसे मनाऊं तुम्हें
तुम ही बताओ
तेरे चरणों  में
मेरा धाम
है राम, कैसे हो तुम राम….
चंचल ये मनवा मेरा
कहना न माने
जाने को इत् उत्
ढूंढे बहाने
कैसे लगाऊं
तुम में ध्यान
ले लो शरण में
मुझको राम
है राम, कैसे हो तुम राम…
वध रावण  का करके
तुमने असत्य को मारा
शबरी, केवट का तुमने
जीवन संवारा
विनती करुँ मैं तुझ से
जग के विधाता
मेरा भी जीवन संवारो
मेरे राम
है राम, कैसे हो तुम राम
बिगड़ी बनाते सब की
मेरी भी सुध लो
दीप जलाऊं सुबह शाम
है राम, कैसे हो तुम राम, कैसे हो तुम राम…..

सुशील सरना

8 Comments

बहुत ही सुन्दर भक्तिभावपूर्ण विनती जो मैंने तो सुन ही ली, राम भी अवश्य
सुनेंगे और पढेंगे, किन्तु ५-सितारों सहित !

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आपकी इस हिर्दयग्राही प्रशंसा का हार्दिक धन्यवाद सर जी

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बहुत सुन्दर और परिपूर्ण, बिनती और प्रार्थना युक्त भक्तिगीत, जो पढ़कर अपने आप जी गुनगुनाता है. बहुत मधुर, मनभावन रचना .
हार्दिक बधाई

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sushil sarna Reply:

@Vishvnand,
thanks a lot for your so nice commnt and appreciation Sir jee

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Bhaktibhavse paripurn, sundar rachna sirji…
Man prasann ho gaya padhkar……

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sushil sarna Reply:

@dr.paliwal,
deep thanks from the bottom of my heart Dr.Sahib for such a nice comment.

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एक बहुत ही सुन्दर भक्ति रचना.

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sushil sarna Reply:

@c k goswami,
आपकी इस प्रशंसा का हार्दिक धन्यवाद सर जी

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