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मेरे देश को ये क्या हो रहा है

मेरे देश को ये क्या हो रहा है

कोने में बैठा भारतीय रो रहा है
मेरे देश को किसकी नज़र लगी ,ये क्या हो रहा है ?
मेघालय आसाम में उल्फा आतंक मचा रहा है
उडीसा ,झारखण्ड,छत्तीसगढ़ में  नक्सलवाद  हिंसा रचा रहा है
महाराष्ट्र में मराठी माणुस का हव्वा दिखा पुरबियों को धमकाया जा रहा है
हिंदी के विरोध में तमिलनाड को हिंसक आग से धधकाया जा रहा है
बंगाल केरल त्रिपुरा में कम्युनिस्टो का राज है
पर सच तो ये है की मावोवादी वहां भी सरताज है
यु पी में दलित  सवर्ण के नाम पर  घृणा  भरने का क्रम जारी है
वहीँ जम्मू कश्मीर में आतंकवादियों का पलना भारी है
पंजाब में अब भी कुछ लोग सिक्खों को बरगला रहे हैं
झारखण्ड में आदिवासी नेता बन कर लोग  करोडो खा रहे हैं
बिहार में पिछडे अगडों की राजनीती चरम पर है
गुजरात में नेताओं की सियासत धरम पर है
उडीसा में धरम हिन्दू क्रिश्चन में भेदभाव पैदा कर रहा है
वहीँ देश का गुमराह नौजवान देश का पडोसी से सौदा कर रहा है
इस अराजकता को भारत कब से ढो रहा है
कुछ राज्यों को छोड़ दो ,बाकी सारा भारत आँखे मूंदे सो  रहा है
कोने में बैठा भारतीय रो रहा है
मेरे देश को ये क्या हो रहा है ?
———-सी के गोस्वामी(चन्द्र कान्त) जयपुर

9 Comments

Though the number of miscreants against the huge Indian population of
above 100 crores is very little, it’s not understood as to how such an
anarchy and carnage are gaining advantage on the face of our so-called
pride of governance mighty martial force ? I earnestly request all the
poets of the forum to gird up their loins to emphasize the need of
making our adminstrative machinery adequately active to quash such
miscreantss after a thorough house-to-house search withou further
loss of time so as to cut this poisionous plant in the bud !
Thanks, Dear Chandrakant Ji for torching upon the proliferating
anarchy and carnage throughout the country ! Let me brighten the
5-stars on this arduous attempt of yours !

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c k goswami Reply:

@ashwini kumar goswami, सच पूछो तो इस कवी मंच में मुझे लेन और इस प्रकार की कवितायेँ लिखने के लिए प्रोत्साहित करने का श्रेय आप ही को जाता है.मेरा कवी सोया हुवा था आप ही के द्वारा बार बार लिखने के लिए उकसाने का ही ये परिणाम है की मैं देश और समाज के इस परिद्रश्य को कविता के रूप में लिख पा सका हूँ.
आपका मार्ग दर्शन उसी प्रकार मिलता रहेगा जिस प्रकार मेरे अन्य सहयोगी श्री विश्वनान्दजी,सर्नाजी,राकेशजी अंजना राज्दीप्जी और राजेश गुप्ता ‘राज’तथा पालीवालजी जैसे कवियों से मिलता रहा है.

श्री अश्विनिकुमार्जी की टिपण्णी ने मुझे भरपूर प्रोत्साहन दिया है -इसके लिए उन्हें पुनः धन्यवाद

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वर्तमान परिस्थितियों का काला पक्ष आपने उजागर तीक्ष्ण प्रहार किया है- आपका ये निर्भीक प्रयास सराहनीय है सर – बधाई

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c k goswami Reply:

@sushil sarna, जब आप लोग अपनी सटीक प्रतिक्रिया दे कर किसी रचना की सराहना करते हैं तो लिख्नेवाके को जो आनंदानुभूति होती है ,उसका वर्णन करना मुश्किल हो जाता है.प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद.

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कविता अति सुन्दर. timely और उपयुक्त है , बहुत प्रशंसनीय.
पर इसमे विदित की हुई बात देश और देशवासिओं की भयानक और बुरी स्तिथि का सत्य दर्शन है. जल्द ही ये असलियत देशवासिओं के मन में ढल और उभर कर कोई उग्र और ठोस आन्दोलन की जरूरत है वरना इसका कोई हल नज़र नहीं आ रहा..
चंद्रकांत जी, इस सुन्दर ५ तारांकित और महत्वपूर्ण रचना के लिए हार्दिक साधुवाद

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c k goswami Reply:

@Vishvnand, आपकी टिप्पणियों ने मुझे सदा ही आगे बढ़ने का प्रोत्साहन दिया है.कुछ समाज और देश की ज्वलंत समस्यायों पर लिख सका,यह सब आप जैसे मर्ग्दार्शियों के कारण ही संभव हो सका है.विश्वानन्द जी को धन्यवाद-उनकी इस टिपण्णी के लिए.

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speechless

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c k goswami Reply:

@rajdeep, thank you sir

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Bahut sundar, vastavikta ko darshati tatha sochne par majbur karti yah rachna yakinan 5 sitaron se kai jada ki kabiliyat rakhti hai….
Mera abhivadan swikar karen…..

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