“आतंकवाद”
“आतंकवाद”
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आतंकी हमला होता तब हिल जाता है पूरा देश,
कर्फ्यू और रेड-एलर्ट का बस हो जाता है आदेश !
घिसे पिटे से लगते हैं अब ये सरकारी जुमले,
बार बार हो चुके हैं और भी हो सकते ये हमले !
जन-धन का भlरी विनाश सहते तब चिल्लाते लोग,
बेबस सी सरकार हमारी बैठा देती मात्र आयोग !
बरसों लग जाते हैं हो पाता नहीं चालान भी पेश,
पीड़ित जनता को है पहुँचती असहनीय सी ठेस !
जांच प्रक्रिया लम्बी चलती, भारी-भरकम व्यय होता,
केवल गवाहों के चक्कर में राज-कोष का क्षय होता !
सेवा-निवृत्त न्यायाधीशों को फिर ऊंची कुर्सी मिल जाती,
भारी वेतन भत्तों का फिर जनता ही बोझ उठाती |
जाँच प्रक्रिया बरसों तक भी पूरी हो नहिं पाती,
आतंकी हमलों की शंका ज्यों की त्यों रह जाती |
हाल ही सेना-प्रमुख ने जताई ऐसे हमलों की शंका,
जिससे लगता बजा रहे हैं आतंकी अपना डंका !
बोले हम तैयार हैं कैसा भी सामना करने को,
क्या हम पूछें कहाँ गए थे पूर्व में यह करने को ?
क्या इसका यह अर्थ है, हम तैयार हैं फिर मरने को ?
इने गिने आतंकी क्यों न खोज लिए जा सकते तुंरत,
क्या ये नामुमकिन है, नष्ट न हो सके ये सारा तंत्र ?
केवल लेफ्ट-राइट की कवायद से डरते नहिं आतंकी,
घात लगाए बैठे हैं वो, करने को अपने मन की !
अब आवश्यक है हम आतंकवाद करदें निर्मूल,
प्रतीक्षा में बैठे रहना हमारी होगी बड़ी ही भूल !
समाचार पत्रों को भी लानी होगी ये चेतना,
केवल खबरें छपने पर निश्चिंत होकर नहिं बैठना !
“कहनी है यह बात हमें इस देश के पहरेदारों से”,
“संभल के रहना अपने घर में छुपे हुए गद्दारों से” !
जय हिंद, जय हिंद, भारत-माता की जय !
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10 Comments
आदरणीय गोस्वामी जी, सरकारी तन्त्र का आपने सुंदर विश्लेषण किया है-बस घोषणाएं, सांत्वना,भाषण यही सब देश की जनता को परोसा जा रहा है – सही कहा आपने कि जनता को स्वयम जागरूक होना पडेगा – रचना के लिए आपको बधाई
ashwini kumar goswami Reply:
November 5th, 2009 at 5:24 pm
@sushil sarna,बहुत बहुत धन्यवाद,
प्रिय सुशील जी !
आतंकवाद और उससे निपटने आज के हालत पर अति सुन्दर, भावपूर्ण और अर्थपूर्ण रचना . बहुत प्रशंसनीय ,
अश्विनी कुमार जी, इस सुन्दर रचना के लिए बधाई और तहे दिल से शुक्रिया .
काश अब तो ऎसी कुछ असली निर्णायक और प्रभावी ठोस प्रतिक्रया और कारवाई हो आतंक और आतंकवादियों के खिलाफ.
ख़याल आया, इसी दुविधा में मैंने मेरी कविता ” कठोर कारवाई ….!” भी लिखी है जो ४ अगस्त ०९ को पोस्ट हुई थी शायद आप देखना चाहें
http://p4poetry.com/2009/08/04/%E0%A4%95%E0%A4%A0%E0%A5%8B%E0%A4%B0-%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%88/
ashwini kumar goswami Reply:
November 5th, 2009 at 8:04 pm
@Vishvnand,आपके सुझावानुसार मैंने
आपकी श्रेष्टतम कविता “कठोर कार्यवाही” अच्छी तरह से पढ़ी और आतंकवाद
सम्बन्धी विस्तृत और सटीक लेखन हेतु समुचित टिप्पणी भी अंकित करदी है
जिसका कृपया अवश्यमेव अवलोकन करें ! हार्दिक धन्यवाद !
अश्विनी जी, कुछ लोग घड़ी के अलार्म से उठ जाते हैं और कुछ को झकझोड़ कर उठाना पड़ता है. आपकी ऐसी कवितायेँ लगातार हर तरफ से आयें और सब तक पहुंचायी जाएँ तो शायद हमारे देश का आम नागरिक उठ पाए वरना ये नींद काफी गहरी है. रचना सुन्दर है और अच्छी भी लगी पर सत्य की कड़वाहट दुःख भी देती है.
congrats
i loved it

1) Born: 14-03-1936 (Bikaner-Rajasthan)
2) Caste: Goswami Brahmin.
3) Religion: Sanatan Dharm. (Devotee of Mother Universe-Jagadamba)
4) Status: Pensioner (Retired A.A.O.)
5) Hobbies: Deep devotion, Music (A veteran musician), Chess, Solving
crossword puzzles and writing proses/verses in English,
Hindi, Brij Bhasha etc. A veteran flautist & Synthesizer/Harmonium Wizard.
अश्विनीजी ने आतंकवाद के खिलाफ काफी सटीक बात लिखी.मात्र आयोग बिठाने या यह कह देना की कठोर कार्यवाही की जायेगी या ये कह देना हम पूरे सावधान और सजग हैं सब बेकारकी बातें हैं और इन बातों से आतंकवाद न तो कम होगा और न ही आतंकवादी कार्यवाहियां रुकेंगी .अब समय आ गया है कि कुछ करके दिखाएँ.
अंत में लिखी कवि भरत व्यास की तलाक फिल्म के गीत की ये पंक्तियाँ अश्विनीजी ने बहुत अच्छी उद्धृत की हैं “संभल के रहना अपने घर में छुपे हुवे गद्दारों से ” कवि को अच्छी रचना के लिए बधाई.
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ashwini kumar goswami Reply:
November 5th, 2009 at 11:35 am
@c k goswami, धन्यवाद चंद्रकांत जी,
आपकी टिप्पणी भी प्रभावशाली होती है ! हम सारे कविगणों को इस विषय पर
न केवल गहनता से चिंतन करने की आवश्यकता है बल्कि इसका प्रचार करके
इस बुराई को समूल नष्ट करने हेतु प्रयासरत भी होना है !
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