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“EK AUR AAHUTI”( khand kavya) KUCHH ANSH

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“एक और आहुति” (खंड-काव्य)रचना-प्रदीप भारद्वाज “कवि”
(डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी की बलिदान-गाथा)

राष्ट्र हित में वीर जो आहुति चढाते प्राण की.
पूज्य रहती है धरा पर रीति यह बलिदान की.
यदि राष्ट्र हित बलिदानियों का स्मरण होगा कहीं .
सजल होते उन द्रगों में श्यामा भी होंगें वहीँ .

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जिसके ह्रदय में राष्ट्र के प्रति भक्ति के दीपक जलें .
कंटकों से जूझकर वे शूल-पथ पर भी चलें
सामने हो काल फिर भी जो कभी डरते नहीं.
होते अमर इस लोक में ही वे कभी marte नहीं.

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शांति डगर पर अगर विश्व यह चाहे अपना धरना.
ह्त्या से जन्नत मिलती है यह विचार होगा दलना.
फिर हर मंदिर में चाँद मिलेगा मस्जिद में मुरली की तान.
सभी एक थे; सभी एक हैं ; प्यारा खुदा और भगवान.

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चक्र-व्यूह में फंस न पाए राष्ट्र की आराधना.
चक्र से ढक सूर्य को गांडीव की कर साधना
राष्ट्र के इन जयद्रथों के क्रत्य तब मिट पायेंगें.
ध्रतराष्ट्र के अरमान सारे धूल में मिल जायेंगें .

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5 Comments

  1. Ravi Rajbhar says:

    Bahut khub Bhardwaj ji….
    bahut achhi panktiyan hain..

    • Ravi Rajbharji Apake Sneh का Aabhari हूँ kritagya हूँ
      Dhanya vaad की Uurja आपकी जब मिली
      Sanjivani Pran में khilkhilane लगी
      Utsah vardhan से Itani मिली Preranaa
      मेरे Hraday में lekhan की Kaliyan Khileen .

  2. sangeeta says:

    Wah, Pradeepji! Deshbhaaaaakti se paripoorna ek atyanta hi sashakt rachana!

  3. Dhanya Vaad Sangeeta जी apaki देश bhakti को Pranam
    और achchha लिख sakoonga.
    Itana Sundar , Itana prerak .Itana Achchha ये paigaam .

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