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घर का भेदी

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Hindi Poetry

घर का भेदी कह कर क्यों हो

विभीषणजी की निन्दा ?

सत्यनिष्ठ वह राम-भक्त

समझे सीता की व्यथा ।

 

दुष्टा बहना ने बहकाया,

कामी रावण को उकसाया,

छल-बल से पापी असुर

सती सीता को हर लाया ।

भाई की दुर्मति से त्रस्त

रोए विभीषण की सज्जनता,

सत्यनिष्ठ वह राम-भक्त

समझे सीता की व्यथा ।

 

राममयी सीया धर्ममयी  

दृढ़ नारीत्व का प्रतीक,  

मुसीबतों से लड़े अकेली  

निराधार नार निर्भीक ।

 मोहान्ध हठधर्मी के आगे

 विवश विभीषण की नम्रता,

 सत्यनिष्ठ वह राम-भक्त

 समझे सीता की व्यथा ।

 

रावण समझाए न समझा,

राज-सभा में हुआ क्लेश ।

अपमानित कर मार-पीटकर

देश-निकाल का दिया आदेश ।

देश छूटा, भाई रूठा

पर रही अविचल नीतिमत्ता,

”घर का भेदी” कह कर क्यों हो

वीर विभीषण की निन्दा ?

सत्यनिष्ठ वह राम-भक्त

समझे सीता की व्यथा ।

 

 

 

 (23, 24/02/2008)

9 Comments

  1. vartika says:

    solah aane sach baat bahut perfectly aapne kavita mein piroyi hai… perfect rhyming… shabdon kaa khoobsoorat istemaal… aur ekdam smooth flow… aur message to itnaa strong aur tarkik hai hi… so in short a gr8 wrk….. 5 stars for u….:)

  2. Vanita says:

    धन्यवाद, वर्तिका.
    आपके सितारों ने मेरे दिल को रोशनी से भर दिया. 🙂
    Vanita.

  3. Vishvnand says:

    बहुत सुन्दर बड़ी मनभावन अर्थपूर्ण रचना .
    इस सुन्दर रचना के लिए हार्दिक बधाई ….

    ये तो स्वार्थी दलबदलू राजनीतिज्ञ हैं जो खुद रावण से हैं पर अपने को विभीषण समझते हैं और इस पावन नाम को बदनाम करते हैं

  4. Ravi Rajbhar says:

    वनिता जी ….
    रचना आपकी बहुत अच्छी है….
    आप मेरी बातो का बुरा ना माने….क्या धर्म भक्ति से पहले देश भक्ति नहीं है…?

    • Vanita Thakkar says:

      @Ravi Rajbhar,
      Ravijee, DHARMA is above the limits of land and castes and groups.
      It is very unfortunate, most unfortunate rather, that such questions of Desh-Bhakti Vs Dharma-Bhakti arise.
      We should understand Religion in real sense.
      Kumbhakarna knew that Ravana was wrong, but he chose to support him out of his love, respect and loyalty towards his elder brother. He met his fate – death. We salute his loyalty, but he supported ADHARMA and was killed ….
      Vanita.

  5. Niranjan Thakkar says:

    Very meaningful and well-written poem ✩✩✩✩✩

  6. Nilay says:

    Very nice poem……people very often use this age old saying…..”ghar ka bhedi lanka dhayaye” for good or bad intentions…..but seldom realise/understand the gravity of situation which vibhishanji had faced at that time….🙏

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