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चूड़ी को कमजोर ना समझो

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Crowned Poem, Hindi Poetry

(दफ्तरों में जा कर बेकार,कामचोर और निठल्ले अधिकारीयों को
चूड़ी भेंट करना आज रोजमर्रा का काम हो गया है.ये चूड़ी और नारी
जाति  का अपमान है)

चूड़ी को कमजोर ना समझो,चूड़ी की ताक़त समझो
चूड़ी में देवी की शक्ति,चूड़ी से तुम मत उलझो

‘चूड़ी पहन बैठना कहना’ ‘कामचोर की है उपमा
सुन सुनके ऐसे  मुहावरे  ,लगता नारी को सदमा

चूड़ी भेंट कभी मत करना, कामचोर अधिकारी को
बेकार निठल्ले को चूड़ी, अपमानित करना नारी को

पन्ना,पद्मिनी और अहिल्या ताक़त  झांसी रानी की
मर्दों से ना कम आंको,जब बात चले कुर्बानी की

माया ममता जयललिता मीरा कुमार प्रतिभा पाटिल
सोनिया  सुषमा  सिधिया  शीला  सबकी सब हैं  काबिल

तमिलनाडु यूपी दिल्ली सा     कामयाब था राजस्थान
हुयी  तरक्की  महिलाओं  से बढा राज्यों का सम्मान

चूड़ीवाला हाथ ना  होता  ,   है कमजोर और ना बेकार
पाक और भारत श्रीलंका सफल चली इनसे सरकार

प्रतीक आस्था की ये चूड़ी खनक खनक खनकाती हैं
कितनी शक्ति छिपी है इनमे ये स्मरण कराती हैं

आज कई महिलाएं चाहे ,चूड़ी नहीं पहनती हैं
पर चूड़ी महत्ता को   महिला  आजभी  खूब समझती है

नारी अत्याचार दहेज़ शोषण के विरुद्ध जब लड़ती है
मर्द हो कितना शक्तिशाली,चूड़ी कम नहीं पड़ती है

————सी के गोस्वामी(चन्द्र कान्त) जयपुर

16 Comments

  1. Panch Ratan Harsh says:

    संदेशात्मक कवितायेँ,हास्य व्यंग्य रचना ,देश bhakti की rachnaon के बाद नारी सशक्तिकरण की रचना पढने के बाद कोई भी कह सकता है की आप आल राउंड कवि हैं .”चूड़ीवाला हाथ न होता है कमजोर और न बेकार
    पाक और भारत श्री लंका सफल चली इनसे सरकार”
    बेनजीर भुट्टो,इंदिरा गाँधी,सोनिया और भंडार नायके का कितना अच्छा वर्णन किया है.इसी प्रकार जयललिता,शीला दीक्षित,मायावती और वसुंधरा के शासन में हुयी तरक्की का बखान भी खूब किया है. इस रचना पर मेरी और से ५ सितारे.

  2. vartika says:

    एक संवेदनशील मुद्दे को आपने बखूबी अपनी कविता में स्वर
    दिया है… चूड़ी पहनने वाले हाथ यदि केवल घर ही संभालें तो भी उनकी कर्मट्ठ्ता बहुत है….

    • c k goswami says:

      @vartika, vartikaji sabse pahle to main aapka aabhaar vyakt karna chahunga kyonki is manch ki aap pahli mahila samikshak hain jisne nari sashaktikaran par likhi is kavita ki sarahna ki.iske pashchat aapki ye tippani ki “churiyan pahnanewali yadi kewal ghar hi sambhale to unki karmathta bahut hai”
      is tippani par yah kahna chahunga ki nari jati hi apne aap me karmathta ka parichayak hai,wah parichay ki mohtaj nahi.choori ko maine nari ka prateek hi mana hai aur isi wazah se kaha hai ki Choori ko kamjor na samjho.

  3. Raj says:

    फिर से एक और अलग से विषय पर लिखी आपकी ये प्रभावशाली रचना और फिर से एक अच्छा सामाजिक सन्देश. स-आदर नमन चंद्रकांत जी.

    • c k goswami says:

      @Raj,
      धन्यवाद् राज.
      हर बार कोई नया विषय धुंध कर समाज को परोसने का प्रयास करता हूँ और आप जैसे शुभकामना देनेवाले लोग ही मुझे इस और कदम बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करते हैं.

  4. rakesh anjaana says:

    ye kavita maine Apne wife Ko mail kar di hai,,,,,Mujhe aapse Kuch Seekhne Ki naseehat mili hai……jis tarah aapne Choodiyon Ko shakti ,,Kshama aur naritva ka sammaan banaakar Prastoot Kiya wo kaabil-e-taarif hai

    • chandra kant says:

      @rakesh anjaana, आपकी तारीफों से ही ये बन्दा अब तक आपके भरोसे लिखे जा रहा है और अगर ऐसे ही हौसला -अफजाई मिलती रही तो वो लिखता ही रहेगा.शुक्रिया राकेशजी.

  5. rajdeep bhattacharya says:

    yes its a gem of a poem

    • c k goswami says:

      @rajdeep bhattacharya, रतन की परख जोहरी करता है .बिना जोहरी की पहचान के रतन एक कांच का टुकडा मात्र रह जाता है. आपने इस कविता में रतन को ढूंढा,इसके लिए रतन से ज्यादा आप बधाई के पात्र हैं.
      आपके द्वारा दिए जा रहे प्रोत्साहन से ही में विविध प्रकार की कविता लिखने के लिए प्रेरित होता हूँ.धन्यवाद्.

  6. sushil sarna says:

    आदरणीय चंद्रकांत जी, चूडी में छुपी नारी की गारिमा और शक्ती का इतना सुंदर चित्रण पड़कर दिल प्रशंसा किये बिना नहीं रह पाया, आज तक चूडी को कमजोरी,असहाय,अबला और कामचोरी को प्रतीक के रूप में प्रयोग में लिया जाता है-लेकिन किसी ने सीमा पर अपने सुहागों को खुशी खुशी भेजने वाली चूडियों की शक्ति का जिक्र नहीं किया, जीवन कठिनाईयों रोज हंसते हंसते चूडियों की खिलखिलाहट का वर्णन नहीं किया- इतने संवेदनशील विषय को इतनी सुन्दरता से पेश करने के लिए बधाई

    • c k goswami says:

      @sushil sarna, shusheelji main kayee dino se dekh raha hun ki aapki tippaniyan pahle se jyada wazan daar hoti ja rahi hai.shabdon ka chayan aur samiksha kahin meri kavitaon se bhi bhari na padne lage.is prakar sargarbhit sameeksha likhna shuru kar doge to aur bhi likhne ka maza aane lagega.
      naari ko samman dene me sahyog dene ke liye shukriya.

  7. Vishvnand says:

    आपकी यह सुन्दर अर्थपूर्ण और चूडियों गहनों से सजी कल्पनावाली कविता पढ़ जो मन में भाव उभरे उन्हें अति सुन्दर रूप से श्री सुशील जी ने बयां किया है, जिससे मै पूर्ण सहमत हूँ .
    इस कविता और कल्पना की जितनी तारीफ की जाय कम है .
    हार्दिक बधाई

    • chandra kant says:

      @Vishvnand, आपने तो सदैव ही मुझे प्रोत्साहन दिया है .इस प्रोत्साहन का ह्रदय से धन्यवाद्.
      एक बात का आश्चर्य होता है कि जिनके लिए ये रचना लिखी है उन महिलाओं की और से न तो इस कविता में किसी प्रकार कि टिपण्णी आयी और नहीं मेरी पूर्व रचना ‘फर्जी फोन्स’ पर उनकी कोई टिपण्णी आयी जबकि ये दोनों रचनाएँ महिलाओं के लिए ही लिखी गयी थी.
      अगर महिला कवियात्र्री मेरी इस रचना से सहमत नहीं हैं या उन्हें लगता है कि जो लिखा गया है वो सही नहीं है तो इस पर उन्हें अपनी राय अवश्य व्यक्त करनी चाहिए .
      एक बार फिर अनुभवी और वरिष्ठ कवी को धन्यवाद्.

  8. JUHI AGRAWAL says:

    Bahut hi sundar kavita badhai.

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