« »

कविता क्या है ….!

0 votes, average: 0.00 out of 50 votes, average: 0.00 out of 50 votes, average: 0.00 out of 50 votes, average: 0.00 out of 50 votes, average: 0.00 out of 5
Loading...
Hindi Poetry

कविता  क्या  है .…!

कविता  क्या  है,  बिन  समझे  ही
कविता  हम  करते  रहते,
सोचा  है  क्या  किसी  कवि   ने ,
ऐसा  क्यूँ  करते  रहते ……

कविता  को  किसने  है  समझा,
और  उसकी  क्या  परिभाषा,
जो  कहते  उन्हें  ज्ञात  ये  सब  है,
उनको  मैं  ना  समझ  सका ……

मैंने  कविता  से  जब  पूछा ,
उसने  हँसकर  कह  डाला,
“तुमको  क्या  है  परिभाषा  का,
जैसे  आती  लिखता  जा …..”

“बड़े  बड़े  कवि  संत  हुए  जो,
जिनको  मैंने  अपनाया,
उनने  भी  ना  राज  किसीको,
मेरा  ये  कुछ  बतलाया ……”

“मै  जो  चाहूँ,  जैसा  चाहूँ,
जिससे  चाहूँ,  लिखवाती,
तुमको  बस  लिखना  ही  होता,
मैं  तुमको  जो  बतलाती ……”

“जो  कविता  पढ़कर  तुम्हे  लगता,
खुद  चल  कर  ये  आयी  है,
वही  तो  असली  अंश   है  मेरा,
बाक़ी  सब  तो  प्रयास  है …..”

“मैं  उनसे  भी  खुश  हूँ  रहती,
जो  करते  है  प्रयास  मेरा,
उनको  ना   तुम  कभी  दुखाना,
करते वो  भी  प्यार  है  मेरा ……”

“मैं कविता खुद बनकर आती,
जब लगती खुद आयी हूँ
जब ना लगती खुद आयी हूँ
प्रयास बन कर आती हूँ ……”

—- ” विश्व नन्द ” —-


23 Comments

  1. c k goswami says:

    poetic parameters ही वह कविता थी जिसने कविता के सभी मानक बतला दिए थे ,आपकी कविता कविता के मानक को बताने में सफल नहीं हो पाई है.आप कविता की जो परिभाषा दे रहे हैं वो विचार हैं और विचारों को लय में पिरो कर प्रस्तुत किया जाये तब ही वो कविता कहला पायेगी.
    वार्तालाप,किसी घटना,किसी संवाद ,किसी कथन को ज्यों का त्यों लिख देना गद्य की श्रेणी में आता है पद्य की नहीं.
    स्वर और लय के साथ प्रस्तुत की गयी कविता होठों पर आते ही स्वयं प्रस्फुटित होती है.कबीर,रहीम,रसखान,मीरा,सूरदास तुलसीदास,बलिमिकी,मथिलीशरण गुप्त,रामधारीसिंह दिनकर,हरवंश राय बच्चन,सुमित्रानंदन पन्त की रचनाएँ आज भी अपना असर क्यों डाले हुवे हैं ?क्योंकि उनकी कविताओं में मिठास थी शब्दों का चयन और प्रयुक्त स्थान ऐसे थे की बरबस ही वो होठों पर आ कर गुनगुनाने को विवश कर देती है.
    हमारी और आपकी कोई भी कविता ऐसी नहीं है जो किसी को पढने के बाद दुबारा याद ही हो .आये विचारों को ज्यों का त्यों लिख देना किसी भी हालत में कविता नहीं.
    कविता के मामले में हम और आप सभी अभी तक शिशु है और कविता के मामले में हमें युवा होने में भी अभी समय लगेगा.
    सही कविता वो है जिसे लिखनेवाले की बजाय पढ़नेवाला गुनगुनाये.हम अपना कविता संग्रह कितना भी क्यों न बढाले किन्तु वो एक कविता ही हमारी इन सभी कविताओं पर भारी पड़ेगी जिसे आम आदमी गुनगुनाने लगे.ऐसी शक्ति निस्संदेह आपकी कुछ भक्ति रचनाओं में अवश्य है.जिसके लिए आपको भी साधुवाद.

    • Vishvnand says:

      @c k goswami
      I don’t want to comment on your comment. You may continue to feel you have a right opinion about what you have described in your comment.
      But I must admit that you have somehow completely missed to see what poetry seems to be saying in this poem.

      • c k goswami says:

        @Vishvnand, आप वय और अनुभव में मुझसे वरिष्ठ हैं .मेरा आशय केवल कविता की व्याख्या करना था.अगर आप इस परिभाषित व्याख्या से आहत हुवे हों ,जैसा आपकी टिपण्णी से लग रहा है तो ,आप इसे अनदेखा / अनलिखा माने. हो सकता है मैं आपकी भावनाए समझने में असमर्थ रहा हूँ.
        ..
        पर मेरा आज भी ये मानना है कि सही अर्थों में कविता वही है जिसे लिखनेवाले कि बजाय पढ़नेवाला गुनगुनाये.
        जिस दिन हमारी कविताओं को पढ़नेवाले गुनगुनाने लगेंगे,समझिये हमारी कविता अमर हो गयी.

        • Vishvnand says:

          @c k goswami
          मुझे ये महसूस हो रहा है की आप जितना और जैसा कमेन्ट करते हैं उतना आप ये कविता क्या कह रही है, उससे दूर जा रहे हैं.
          मेरी समझ गलत भी हो सकती है …..

          “मैं कविता खुद बनकर आती,
          जब लगती खुद आयी हूँ
          जब ना लगती खुद आयी हूँ
          प्रयास बन कर आती हूँ ……” क्या ये गलत है ….

          “मैं उनसे भी खुश हूँ रहती,
          जो करते है प्रयास मेरा,
          उनको ना तुम कभी दुखाना,
          करते वो भी प्यार है मेरा ……” क्या इसका हमें ख़याल नहीं रखना चाहिए ….

          • c k goswami says:

            @Vishvnand, आपके खुलासे के बाद समझ में आया कि आप कविता की परिभाषा न बतला कर के कविता के मर्म ,कविता की आत्मा,कविता की भावना बतलाना चाह रहे थे ,उसमे आप पूर्णतः सफल रहे हैं.

            • Vishvnand says:

              @c k goswami
              आपकी इस टिप्पणी से मैं आपका हार्दिक अभिवादन करता हूँ , शुक्रगुजार हूँ .
              हाँ, और यह भी की जिनको कविता का अच्छी तरह ज्ञान है उनका कविता और कविता प्यार से सीखने और रचनेवालों के प्रति कर्त्तव्य भी ….

  2. raj says:

    I read the poem. I agree with you sir.

    अक्सर हम देख कर और चख कर जैसे वस्तु विशेष और भावनाओं का आनंद लेते है..वैसा शब्दों में ढालने में संकोचित हो जाते है..और ये कोई मंत्र या फार्मूला तो है नहीं कि एक ही रूप में ढाल दो तो सही है और दूसरे रूप में गलत.

    अपनी पहचान, अपनी शब्दों को बांधने और खोलने का licence बस अपने पास ही होता है….अब चाहे दुनिया उसे कोई भी नाम दे 🙂

  3. medhini says:

    A nice thoughtful poem, indeed.

  4. rajdeep says:

    i agree wid raj
    and i love the poem
    if u judge people then u hav no time to love them.
    u r d best
    likhte rahiye

  5. dr.paliwal says:

    कविता की कहानी उसकी अपनी जुबानी……
    पढ़कर मन प्रसन्न हुआ सरजी………

    • Vishvnand says:

      @dr.paliwal
      आपके कमेन्ट के भाव खुशी दे गए. बहुत शुक्रिया .

  6. Raj says:

    विश्व्नंद जी, आपकी कविता के द्वारा दिए कविता में मर्म रुपी सन्देश से मैं सहमत हूँ और इस बात से भी कि कविता लिखने का प्रयास करने वाला भी प्रशंसनीय है.

    पर मैं चन्द्र कान्त जी की इस बात से भी सहमत हूँ कि हर लिखा हुआ कविता नहीं होता. हमारे ख्यालों को पकडे हमारी कलम बहुत कुछ कागज़ पर उतारती है, पर हर वो पन्ना हमारी कविता की किताब में संग्रहित नहीं किया जा सकता. उस लिखे हुए का एक मुकम्मल रूप होने पर ही उसे कविता कहा जा सकता है.

    • Vishvnand says:

      @Raj
      आपके कमेन्ट का बहुत शुक्रिया.
      ये कविता इसी विचार में उभरी थी की कविता पढ़ जब ऐसा लगे की ये कविता खुद अपनेआप ही कागज़ पर उभर कर आयी है वही कविता है. बाकी कविता रचना कविता रचने का प्रयास है. कुछ प्रयास असली कविता तक पहुँच पाते हैं जो कविता की अच्छे कवियों को देन है, बाक़ी के प्रयास अच्छी कविता और खराब कविता के बीच मंडराते रहते हैं. और इस variation का expanse बहुत बड़ा होता है.जो यहाँ हम सुविधा के लिए १ से ५ स्टार की grading में बैठाते हैं. और हाँ, हर कवी की अपने आप में कविता की कुछ परिभाषा तो होती ही है चाहे वो सर्वमान्य हो या न हो.
      आपके कमेन्ट ने मुझे ये मेरे अपने विचार लिखने प्रोत्साहित किया.
      इसी कारन मुझे ऐसा लगता है के जिन कविओं को कविता के बारे में अच्छा ज्ञान है, अध्ययन है उन्हें नवोदितों का जरूर मार्गदर्शन करना चाहिए पर इस प्रकार की नवोदितों का उत्साह कायम रहे और त्रुटियों का सुधार हो. ये critical appreciation से ही possible है न की criticism से.

      • Raj says:

        I agree with you here that the way a comment is given matters a lot from an experienced or good poet to those who are new to this field and need direction.

  7. Dr Nutan Gairola says:

    बहुत सुन्दर तरीके से कविता को परिभाषित किया आपने…

    “मैं कविता खुद बनकर आती,
    जब लगती खुद आयी हूँ
    जब ना लगती खुद आयी हूँ
    प्रयास बन कर आती हूँ ……”

    आपकी इन पंक्तियों से अनायास ही नए कवियों को भी प्रोत्साहन मिलता है जो प्रयासरत हैं …. वैसे कविता भाव के साथ खुद ब खुद चली आती है… सादर

    • Vishvnand says:

      @Dr Nutan Gairola
      इस सुन्दर प्रतिक्रिया और इसमें विदित भावों के लिए आपका तहे दिल से शुक्रिया है

    • Vishvnand says:

      @kapil kumar
      Deleted

      • dr nutan gairola says:

        @Vishvnand, … यहाँ पर किसी ने मेरा फोन नंबर द्वेष भाव से छापा है … मैं नहीं जानती कौन और क्यूं …और ना मुझे इस तरह की बातों में पड़ना है … कृपया आप इन कमेंट्स को हटा / (डीलिट कर) दे ..जो आपकी रचना से सम्बंधित नहीं है …सादर

Leave a Reply