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“स्वतंत्रता की अर्जी……….”

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Crowned Poem, Hindi Poetry

उम्र हो गई बासठ मेरी, सुनलो सब तुम मेरी अर्जी,
“स्वतंत्रता” है नाम मेरा, करो नहीं जो आये मर्जी,
मेरी रक्षा फर्ज तुम्हारा, देश का सोचो छोडो खुदगर्जी,
गुनाहों से ना तुम रखो वास्ता, चुनो भलाई का ही रास्ता,
रिश्वत लेकर काम हो करते,अपने पाप के घडे हो भरते,
गरीब जनता को ना छलो, विद्वानों से तुम ना जलो,
जातपात के मिटा अँधेरे, ज्योत से ज्योत जगाते चलो,
स्वप्न जिन्होंने मेरा देखा, जन्मे थे इसी धरा पे नेता,
शहादतें ना जाया जाये, सोचो कैसे मुझे बचाएं,
अपनाओं ना फिरसे गुलामी, करते हो क्यों मेरी नीलामी,
“गाँधी सुभाष” के बनाये पुतले, पर क्या हो उनके रस्ते चले?
एक अंश भी उनका अपना लो, तो मुझको भी राहत मिले,
स्त्री पुरुष का भेद मिटाओ, दहेज़ के लिए ना इन्हें जलाओ,
आस्तिक नास्तिक जो भी हो, इंसानियत में देखो भगवान,
उसके नजर में ना उंच नीच है, होते है सब एक समान,
पढाओं अब यह ज्ञान पाठ गुरूजी, तुमसे है यह मेरी अर्जी,
पर भाषा पर करो हुकूमत, ज्ञान साधना बहुत भली,
दिल को टटोलो ज्ञानपथ खोलो, माँ “हिंदी” को ना चढाओ सूली,
लाखों मेरे लिए जले कटे है, इस बात को तुम ना यूँ भूलो,
गर थोडी सी बची शर्म है, जाकर उनके चरणों को छू लो………….

20 Comments

  1. C K goswami says:

    स्वतंत्रता की सुनी व्यथा ,वो कितनी दुखी है हम सबसे
    सोचा क्या था हुआ है क्या ,दुखडा रोती है वो कबसे
    अब भी सुधर जाये हम सब , उम्मीद अभी वो रखती है
    पिच्छले बासठ सालों से वो हमको रोज परखती है
    स्वतंत्रता दिवस पर एक सुन्दर रचना .

  2. Raj says:

    सुन्दर विचारों से परिपूर्ण अर्जी स्वतंत्रता की योगेश जी, पर फाईल में वज़न न हुआ तो पता नहीं कब कौन इसकी धूल हटायेगा. लगता है हम-आपके जैसा अगले साल फिर से नई अर्जी लगाएगा.

  3. rajdeep bhattacharya says:

    outstanding, fantabulous

  4. sonal says:

    A very nice poem.

  5. Vishvnand says:

    This poem is like a divine injection for leaders and all we citizens to muse over all our wrong doings since independence, repent for all wrongs done and resolve to do what we should be doing to re-ignite nationalism of pre-independence days again in Independent India, for which the National heroes have sacrificed their lives and not to forget their sacrifices.
    A fantastically meaningful, beauty of a poem.
    Kudos to you Dr Paliwal

  6. medhini says:

    A nice, thoughtful and meaningful poem.

  7. Ravi Rajbhar says:

    स्वतंत्रता दिवस के लिए दिल पहले से खुस है..
    आपकी सुंदर रचना से दिल को और भी खुसी हुई…
    साथ ही कुछ सिखने को भी मिला….रचना बहुत अच्छी है…दोस्त ….

  8. Parespeare says:

    an immensely beautiful poem Paliwalji

  9. sushil sarna says:

    a beutifully written,explained and with a depth of the meaning of Indepedence-great Paliwal jee-badhaaee

  10. अच्छी रचना है पालीवाल जी ..”स्वतंत्रता की अर्जी” सच में स्वतंत्रता की अर्जी है …

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