« »

‘ सोनपरी और मुस्कान ‘ ( A Fairytale)

3 votes, average: 5.00 out of 53 votes, average: 5.00 out of 53 votes, average: 5.00 out of 53 votes, average: 5.00 out of 53 votes, average: 5.00 out of 5
Loading...
Crowned Poem, Hindi Poetry

” सोनपरी और मुस्कान ” (बाल कविता )

दूर कहीं एक गाँव में
रहती थी ‘ मुस्कान ‘ ,
माँ की थी वो राजदुलारी ,
और पिता की थी वो जान !
चिडियां-सी चहकती ,
फूलों-सी महकती ,
चेहरे पे उसके
सदा रहती थी मुस्कान !
दादी से अपनी वो
सुनती थी परियों की कहानियां !
नेकी और ईमानदारी का पाठ
सिखाती थी वो कहानियां !
ख्वाबों को हकीक़त के आशियाने से
सजाकर लुभाती वो कहानियां !
सुनकर परियों के देश की
वो अनगिनत कहानियां ,
नेकी और ख़ुशी मुस्कान की
बन गई थी पहचान !
कहानी सुनकर परियों की
सोचा करती थी मुस्कान ,
कि नेक राह पर जो है चलते ,
क्या परी उन्हें देती है उपहार ?
एक दिन यूँ ही सोचते हुए
एक घने जंगल में पहुंची मुस्कान ,
जहाँ था केवल सन्नाटा ,
और वहीँ पर था एक वृक्ष विशाल !
उसी वृक्ष कि टहनी से ऊपर
बनी हुई थी सीढियां कुछ ख़ास ,
जिन पर चलकर मुस्कान
पहुंची एक सुनहरे दरवाज़े के पास !
खुला जब वो दरवाज़ा ,
तब वो रह गई थी हैरान ,
दरवाज़े के उस पार
था परियों का देश ऐसा ,
रंग-बिरंगी थी वहां कि दुनिया ,
टिमटिमाते तारों-सी दुनिया !
न देखी, न सुनी थी कभी ,
ऐसी परियों-सी सुंदर वो दुनिया !
कलकल बहते हुए झरने ,
झरनों में खेलती वो नन्ही परियां ,
चोकलेट और आइसक्रीम से लदे पेड़ ,
रंग-बिरंगे फूलों की क्यारियां !
परियों की इस दुनिया में ,
जाने कब खो गई मुस्कान !
तभी वहां परियों की राजकुमारी
‘ सोनपरी ‘ आई ,
मुस्कान को देख पहले वो मुस्कुराई ,
फिर पास आकर उसे
उपहारों की गठरी थमाई !
जब मुस्कान ने सोनपरी से
कारण था जानना चाहा,
तब सोनपरी ने बतलाया ,
जो करते है नेक काम ,
उन्हें मिलता है ये उपहार !
उपहार लेकर सोनपरी से ,
नींद से जाग उठी मुस्कान !
आँखे खुली मुस्कान की
तो माँ का दिया उपहार अपने पास पाया !
सपनों में जो थी सोनपरी ,
आँख खुलने पर उसने अपनी माँ को पाया !

– सोनल पंवार

17 Comments

  1. rajdeep bhattacharya says:

    what a rite
    a nice story poem
    marvelous

  2. Parespeare says:

    a beautiful poem Sonal
    very intricately weaved with a dream

  3. वाह क्या बात है …किसी भी कहानी को कविता के रूप में प्रस्तुत करना कठिन कार्य है , पर आपने तो कमाल कर दिया …

  4. Ravi Rajbhar says:

    बहुत खूब sonal ….sunder rachna ..

  5. c.k.goswami says:

    वर्णात्मक काव्य रचना बहुत ही कम देखने को मिलती है .आपकी रचना एक बहुत ही अच्छे ढंग से लिखी गयी रचना है .ऐसी रचना के लिएदिल से शुभकामनायें
    सी के गोस्वामी (चन्द्र कान्त)जयपुर

  6. Vishvnand says:

    बहुत सुन्दर रचना है,” सोनपरी और मुस्कान ”
    सुन्दर बहाव और सुमधुर कथन
    पढ़ने में बड़ी ही मनभावन
    हार्दिक बधाई.देता है मन

    • sonal says:

      @Vishvnand,
      मेरी रचना ” सोनपरी और मुस्कान ”
      पर पढ़कर आपका ये कथन
      चेहरे पे आई मेरे मुस्कान
      और हार्दिक बधाई लेता है मन !
      Thank u so much sir .
      regards
      sonal.

  7. arun says:

    sonal u r born genius

  8. Pawan Vats says:

    आप है सोना आपकी कविता खरा सोना आपको हार्दिक बधाई
    पवन वत्स

Leave a Reply