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‘ सावन ‘

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Hindi Poetry

‘ सावन ‘

बारिश कि बूंदों से ,
भीगा हुआ सावन है आया !
कलियों के चेहरों पर ,
खिलता हुआ यौवन है छाया !
नदियों और तालाबों में ,
उमंगों से भरा जीवन है आया !
घनघोर घटाएँ ऐसी है बरसी ,
इठलाता हुआ सावन है आया !
धरती की प्यास बुझाकर ,
ऐसा निर्मल जल है आया !
मेघों ने मल्हार जो छेडी ,
तो झूम-झूम कर सावन है आया !
बारिश की बूंदों से ,
भीगा हुआ सावन है आया !

– सोनल पंवार

13 Comments

  1. अच्छी रचना है …
    बारिश कि बूंदों से ,
    भीगा हुआ सावन है आया !

  2. rajdeep says:

    sonal
    i loved it
    really nice
    bahut dino baad aisi jhari
    maja aa gaya

  3. rajdeep says:

    aishi kavitao ki barrish jaari rakhe plz

  4. Parespeare says:

    a beautiful poem
    lovely

  5. Vishvnand says:

    Sonal,
    अति सुन्दर, प्यारी सी, छोटी सी
    बड़ी ही मीठी सी, मनभावन रचना ,
    बहुत मनभायी ,
    हार्दिक बधाई

  6. sushil sarna says:

    सोनल, चंचल,सुंदर,प्यारी सी बारिश की बूंदों में छुपी निर्मल भावनाओं का सागर है आपकी ये रचना -बधाई इस सुंदर रचना के लिए

  7. neeraj guru says:

    सोनल अच्छा लिखा है,और अच्छा लिखो.

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